LIVE UPDATE

घनी आबादी में राइस मिल! सिंघिया के भादरापारा में फूटा जनाक्रोश, ग्रामसभा में NOC रद्द करने की तैयारी… “दबाव में जारी हुई NOC” – सरपंच का बड़ा दावा | ग्रामीण बोले – स्वास्थ्य और भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

कोरबा/कटघोरा। ग्राम पंचायत सिंघिया के आश्रित ग्राम कर्रा स्थित भादरा पारा मोहल्ला इन दिनों प्रस्तावित राइस मिल को लेकर उबाल पर है। घनी आबादी के बीच उद्योग स्थापना को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। लोगों ने आरोप लगाया है कि जिस मोहल्ले पर राइस मिल का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा, उसी मोहल्ले के निवासियों को न तो विश्वास में लिया गया और न ही उनकी सहमति ली गई।

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे उद्योग विरोधी नहीं हैं, लेकिन जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और बच्चों के भविष्य की कीमत पर किसी भी उद्योग को मंजूरी नहीं दी जा सकती।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 “धूल-भूसी से घिर जाएगा मोहल्ला, बीमारियों का खतरा”
भादरा पारा के लोगों का कहना है कि राइस मिल शुरू होने पर धान की भूसी, धूल, महीन कण और डस्ट सीधे घरों तक पहुंचेगी। साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही, शोर और कंपन से सामान्य जीवन प्रभावित होगा।
स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों ने आशंका जताई कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए तो दमा, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि “आज सिर्फ धूल की बात है, कल बच्चों के स्वास्थ्य और पूरी बस्ती के भविष्य का सवाल होगा।”

अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल –
ग्रामीणों ने प्रशासन से कई अहम सवाल पूछे हैं—
क्या ग्राम पंचायत की बैठक विधिवत हुई थी?
क्या प्रस्ताव नियमानुसार पारित किया गया?
क्या प्रभावित मोहल्ले के लोगों से राय ली गई?
क्या सभी वैधानिक स्वीकृतियां वास्तव में प्राप्त हैं?
क्या पर्यावरणीय प्रभाव का कोई स्वतंत्र परीक्षण हुआ?
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरी अनुमति प्रक्रिया की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए

ये खबर भी पढ़ें…
शर्मनाक! अटल जी की प्रतिमा पर भी कथित खेल? ब्रॉन्ज की जगह सीमेंट पर पेंट का आरोप, कटघोरा के ‘अटल परिसर’ में खुली परतें
शर्मनाक! अटल जी की प्रतिमा पर भी कथित खेल? ब्रॉन्ज की जगह सीमेंट पर पेंट का आरोप, कटघोरा के ‘अटल परिसर’ में खुली परतें
July 28, 2026
कोरबा। छत्तीसगढ़ के निर्माता, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सरपंच का बड़ा खुलासा – “दबाव में जारी करनी पड़ी NOC”
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ग्राम पंचायत सिंघिया के सरपंच मनोज टेकाम ने दावा किया कि राइस मिल से संबंधित NOC सामान्य परिस्थितियों में जारी नहीं हुई।
सरपंच के अनुसार, वार्ड क्रमांक 13 की पंच चाँदनी दीवान के पति प्रमोद दीवान द्वारा उन पर दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें NOC जारी करनी पड़ी।
उन्होंने यह भी कहा कि अनुमति प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेजों की जांच आवश्यक है और ग्रामीणों की आपत्तियां गंभीर हैं।

ग्रामसभा में NOC रद्द करने का प्रस्ताव –
सरपंच ने घोषणा की है कि आगामी ग्रामसभा में राइस मिल के लिए जारी NOC को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
यदि ग्रामसभा प्रस्ताव पारित करती है तो उसकी प्रति SDM, खाद्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी।

ये खबर भी पढ़ें…
युवा कांग्रेस शहर ब्लॉक अध्यक्ष प्रत्याशी अदनान मेमन को इंस्टाग्राम पर मिली जान से मारने की धमकी, पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
युवा कांग्रेस शहर ब्लॉक अध्यक्ष प्रत्याशी अदनान मेमन को इंस्टाग्राम पर मिली जान से मारने की धमकी, पुलिस अधीक्षक से की शिकायत
July 29, 2026
कोरबा। कोरबा में युवा कांग्रेस संगठन चुनाव के माहौल के बीच एक गंभीर मामला सामने आया है। पुरानी बस्ती कोरबा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

 प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग –
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
राइस मिल निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए
साइट का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वतंत्र रिपोर्ट ली जाए
ग्रामसभा की कार्यवाही और NOC दस्तावेजों की फोरेंसिक/विधिक जांच कराई जाए
जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की आगे की अनुमति स्थगित की जाए।

संबंधित पक्षों का पक्ष बाकी –
समाचार लिखे जाने तक राइस मिल संचालक संजय अग्रवाल, प्रमोद दीवान तथा पंच चाँदनी दीवान का विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब सवाल प्रशासन से –
भादरा पारा का यह मामला अब सिर्फ एक राइस मिल का नहीं, बल्कि ग्रामसभा की वैधता, जनसहमति, पर्यावरणीय सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।

ग्रामीणों का कहना है—

यदि आबादी के बीच उद्योग लगाने से पहले लोगों की राय ही नहीं ली जाएगी, तो फिर ग्रामसभा और जनसुनवाई का मतलब क्या रह जाएगा?”
फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह सिर्फ कागजी कार्रवाई करेगा या मौके पर पहुंचकर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करेगा।

Saket Verma

Sub Editor, Lallanguru News Channel | News Editing | Headline Writing | Digital Journalism

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *