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KORBA: रीपा घोटाले की जांच जारी, इधर ब्लैकलिस्टेड फर्म को करोड़ों का भुगतान कराने की गुप्त तैयारी?

महालेखाकार, राज्य स्तरीय समिति और जिला स्तर पर जांच जारी होने के बावजूद अंतिम भुगतान की जल्दबाजी पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता बोला— “सरकारी खजाना लुटाने की तैयारी क्यों?”

कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) योजना अब एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गई है। करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले की जांच जहां एक ओर राज्य स्तरीय समिति, जिला स्तरीय समिति तथा महालेखाकार (AG) कार्यालय द्वारा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिले के कुछ जिम्मेदार अधिकारी विवादित फर्म M/S RAM SAA ALLIED ENTERPRISE PRIVATE LIMITED को करोड़ों रुपये का अंतिम भुगतान कराने की तैयारी में जुटे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच पूरी ही नहीं हुई, तब भुगतान की इतनी जल्दबाजी आखिर क्यों? यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध हो जाती हैं और भुगतान के बाद राशि की वसूली संभव नहीं हुई, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

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क्या जांच से पहले सरकारी खजाना खाली करने की तैयारी?

शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू का आरोप है कि पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताओं के पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों के अनुसार मामले की जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है।

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इसके बावजूद यदि अंतिम भुगतान किया जाता है तो यह न केवल सरकारी वित्तीय नियमों पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

ब्लैंक चेक और ब्लैंक कार्यादेश पर हस्ताक्षर कराने का आरोप

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शिकायतकर्ता का दावा है कि ग्राम पंचायत चिर्रा, सराईडीह, पहन्दा, रंजना, कोटमेर, जमनीपाली, नोनबिरा, कापूबहरा, सेमरा और अरदा में कार्यों के दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं तथा पंचायत प्रतिनिधियों से कथित रूप से ब्लैंक चेक और ब्लैंक कार्यादेशों पर हस्ताक्षर कराए गए।

यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं और पंचायत व्यवस्था के साथ गंभीर विश्वासघात माना जाएगा।

भुगतान के पीछे आखिर किसका दबाव?

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि जांच लंबित होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश आखिर किसके दबाव में की जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की असामान्य सक्रियता कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

राशि को टुकड़ों में बांटकर नियमों से बचने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्यों की राशि को कथित रूप से छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया गया ताकि वित्तीय सीमा से जुड़े नियमों से बचते हुए कार्य एक ही फर्म को दिए जा सकें। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

महालेखाकार की जांच के बीच भुगतान हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?

यदि जांच पूरी होने से पहले करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया जाता है और बाद में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो बड़ा सवाल यह होगा कि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या भुगतान की अनुमति देने वाले अधिकारी इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेंगे?

प्रशासन के सामने अग्निपरीक्षा

अब पूरी नजर जिला प्रशासन, जिला पंचायत तथा संबंधित जनपद पंचायतों कोरबा, करतला, कटघोरा, पाली और पोड़ी उपरोड़ा पर टिकी है। क्या जांच पूरी होने तक भुगतान पर रोक लगाई जाएगी या फिर विवादों के बावजूद भुगतान आगे बढ़ेगा?

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित फर्म के सभी लंबित भुगतानों पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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