मुकेश की यादें’: पेंड्रा में गूंजे स्वर्गीय गायक मुकेश के अमर गीत, झमाझम बारिश के बीच भी उमड़ा संगीत प्रेमियों का सैलाब

‘मुकेश की यादें’ कार्यक्रम में गूंजे स्वर्गीय मुकेश के अमर गीत, छह घंटे तक सुरों की सरिता में डूबे रहे संगीत प्रेमी
पेंड्रा। जिला संगीत एवं कला संरक्षण मंच, जीपीएम के तत्वावधान में हिंदी सिनेमा के महान पार्श्वगायक स्वर्गीय मुकेश चंद माथुर की 103वीं जयंती के अवसर पर पेंड्रा स्थित असेंबली हॉल में भव्य संगीतमय कार्यक्रम “मुकेश की यादें” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जीपीएम जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिभाशाली गायक एवं गायिकाओं ने स्वर्गीय मुकेश द्वारा गाए गए सदाबहार एकल एवं युगल गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां देकर उन्हें स्वरांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत हर गीत ने श्रोताओं को हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर की मधुर स्मृतियों से जोड़ दिया।

स्वरांजलि के रूप में प्रस्तुत हुए सिर्फ मुकेश के गीत
आयोजन समिति द्वारा पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार कार्यक्रम में शामिल सभी कलाकारों ने केवल स्वर्गीय मुकेश के गाए हुए गीतों की ही प्रस्तुति दी। एक के बाद एक प्रस्तुत हुए सदाबहार गीतों ने पूरे सभागार को सुरों से सराबोर कर दिया। कलाकारों की गायकी और श्रोताओं की तालियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

मूसलाधार बारिश भी नहीं डिगा सकी संगीत प्रेमियों का उत्साह
करीब छह घंटे तक चले इस संगीतमय आयोजन के दौरान लगातार बारिश होती रही, लेकिन इसका असर न कलाकारों के उत्साह पर दिखाई दिया और न ही संगीत प्रेमियों की उपस्थिति पर। प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और अंत तक डटे रहे। यह दृश्य जिले में संगीत के प्रति लोगों की गहरी रुचि और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति बढ़ते लगाव का प्रमाण बना।

स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में निरंतर प्रयास
जिला संगीत एवं कला संरक्षण मंच के जिलाध्यक्ष निर्माण जायसवाल ने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व जिले में गीत-संगीत एवं कला गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंच का गठन किया गया था। स्थापना के बाद से मंच द्वारा देश के कई महान गायक-गायिकाओं की स्मृति में दर्जनभर से अधिक सफल संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन आयोजनों से जिले में संगीत के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ा है और नई प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
गरिमामयी रही अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में पेंड्रा नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान, भारतीय जनता पार्टी जैविक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक ब्रजलाल राठौर, भारत स्वाभिमान पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पूरन छाबरिया, पेंड्रा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रशांत श्रीवास, पेंड्रा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष विवेक जायसवाल, विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष हर्ष छाबरिया, नगर पालिका उपाध्यक्ष शरद गुप्ता, नवनियुक्त एल्डरमैन भूधर सोनी, अरुण तिवारी, जयदत्त तिवारी, मोहिनी शंकर तिवारी, मनीराम केवट, समयलाल मिश्रा, मदन पांडे, संतोष साहू, हीराचंद जैन, दीपक कश्यप, शिवराज शुक्ला, अतुल आर्थर, अनिल शिवदसानी, मनदीप सिंह, राकेश शर्मा, नीलेश मिश्रा, अन्नू गोयनका, दीपक अग्रवाल, विष्णु सोनी, सुरेश केशरवानी, श्रीमती उषा पवार, श्रीमती भावना आर्थर सहित विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा सैकड़ों संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
इन कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम का संचालन अंबुज मिश्रा ने किया, जबकि संपूर्ण आयोजन जिला कोषाध्यक्ष आदित्य पांडे के कुशल मार्गदर्शन एवं जिलाध्यक्ष निर्माण जायसवाल के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में निर्माण जायसवाल, विनय सूर्यवंशी, प्रशांत कुशवाहा, मदन सोनी, प्रतीक गुप्ता, मोनू गुप्ता, अंबुज मिश्रा, मोक्ष मिश्रा, जगतराम चौहान, पंकज मिश्रा, समीर खान, अजीत दुबे, पीएनबी शाखा प्रबंधक संतोष कुमार, प्रमोद शर्मा, नरेश सारथी तथा मास्टर नदीम ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
वहीं महिला कलाकारों में श्रीमती पूजा केशरवानी, श्रीमती शैल गुप्ता, श्रीमती स्नेहलता राजपूत, श्रीमती ममता सिंह, सुश्री सोनिया सोनी, सुश्री सोनिया रोहिणी, सुश्री मानवी मिश्रा, सुश्री इच्छा जायसवाल, सुश्री वैष्णवी सोनी एवं सुश्री वैष्णवी केवट ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया।
सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अनूठी पहल
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों एवं संगीत प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला संगीत एवं कला संरक्षण मंच भविष्य में भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों का निरंतर आयोजन करता रहेगा, ताकि जिले की स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सके तथा भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचती रहे। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि अच्छी संगीत परंपराएं समय के साथ और अधिक मजबूत होती हैं तथा समाज को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का कार्य करती हैं।









