पत्रकार सुरक्षा कानून की हुंकार: गुजरात से उठेगी देशव्यापी आवाज, राष्ट्रीय अधिवेशन में होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन

देशभर में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, धमकियों और उत्पीड़न के बीच अब पत्रकार संगठन निर्णायक लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति द्वारा 27–28 जुलाई 2026 को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय अधिवेशन पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।
इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों पत्रकार, संपादक, मीडिया प्रतिनिधि एवं संगठन के पदाधिकारी एक मंच पर एकत्र होंगे। अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य देशभर में “पत्रकार सुरक्षा कानून” लागू कराने की मांग को मजबूत करना और पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वतंत्रता के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है।

संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि “कलम की आवाज को डराया नहीं जा सकता।” यदि लोकतंत्र को मजबूत रखना है तो सबसे पहले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। पत्रकारों का कहना है कि लगातार हो रहे हमले, धमकियां और दबाव निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं, इसलिए अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि सशक्त कानून की आवश्यकता है।
28 जुलाई को अधिवेशन के समापन अवसर पर गुजरात सरकार के मंत्रियों एवं कांग्रेस नेताओं को पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान संगठन पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेगा।

अधिवेशन का संदेश साफ है—
“देशभर के पत्रकार होंगे एकजुट, पत्रकार सुरक्षा कानून होगा मजबूर।”

संगठन का मानना है कि “सुरक्षित पत्रकार ही सशक्त लोकतंत्र की सबसे बड़ी गारंटी है।” यदि पत्रकार निर्भीक होकर जनहित के मुद्दे उठाएंगे, तभी लोकतंत्र की नींव मजबूत होगी और आम जनता की आवाज सत्ता तक पहुंचेगी।
देशभर के पत्रकारों से इस ऐतिहासिक अधिवेशन में शामिल होकर पत्रकार एकता का परिचय देने और पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गुजरात से उठने वाली यह आवाज देशभर में कितना प्रभाव छोड़ती है और पत्रकारों की वर्षों पुरानी मांग को कितना बल मिलता है।









