GPM : 15 लाख का गबन, फर्जी हस्ताक्षर और पंचायतों में तालेबंदी! भ्रष्ट सचिव संदीप दुबे की दबंगई से गरमाया गौरेला, कलेक्टर से FIR की मांग
जांच में सिद्ध हो चुका है 15.55 लाख का गबन, फिर भी संरक्षण!

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM)। गौरेला जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार, गबन और धोखाधड़ी का ऐसा खेल चल रहा है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ग्राम पंचायत सेमरा के सरपंच और सरपंच संघ के अध्यक्ष तूफान सिंह धुर्वे ने कलेक्टर से शिकायत करते हुए पंचायत सचिव संदीप दुबे पर फर्जी हस्ताक्षर, सरकारी राशि का गबन और रिश्तेदारों को अवैध भुगतान करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
सरपंच के फर्जी दस्तखत कर निकाला वेतन!
सरपंच संघ अध्यक्ष तूफान सिंह धुर्वे ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव संदीप दुबे ने ग्राम पंचायत सेमरा के वेतन पत्रक में सरपंच के फर्जी (जाली) हस्ताक्षर कर वेतन निकाल लिया। सरपंच का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी इस भ्रष्ट सचिव को सेमरा पंचायत से मुक्त नहीं किया गया, जिससे उसके हौसले बुलंद हैं।

जांच में सिद्ध हो चुका है 15.55 लाख का गबन, फिर भी संरक्षण!
दस्तावेजों और पूर्व जांच प्रतिवेदन के अनुसार, संदीप दुबे को जब 24 मई 2022 को सधवानी पंचायत से कार्यमुक्त किया जा चुका था, तब भी उसने 31 मई से 17 जून 2022 के बीच 15.55 लाख रुपये का अवैध आहरण किया।दुबे ट्रेडर्स और पंकज दुबे (रिश्तेदार) के नाम पर फर्जी, अप्रमाणित और बिना जीएसटी (GST) बिलों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच समिति ने स्पष्ट रूप से संदीप दुबे को गबन एवं वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया है और विभागीय कार्रवाई व राशि वसूली की अनुशंसा की है।

कमरे में जड़ा ताला, पंचायत कार्य ठप!
ग्राम पंचायत के कमरे में ताला लगा हुआ है, जिससे पंचायत के सारे विकास कार्य ठप पड़े हैं और ग्रामीण परेशान हो रहे हैं।

इन पंचायतों में भी फैला चुका है भ्रष्टाचार का जाल!
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि संदीप दुबे पूर्व में भी कई पंचायतों—ठाड़पथरा, अंजनी, नेवसा, भदौरा, जोगीसार और सधवानी में रहकर फर्जी भुगतानों और वित्तीय गड़बड़ियों के मामलों में लिप्त रहा है।
सरपंच की चेतावनी और प्रमुख मांगें:
1. FIR दर्ज हो: गबन और धोखाधड़ी (फर्जी दस्तखत) के मामले में संदीप दुबे के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज कर जेल भेजा जाए।
2. राशि की वसूली: गबन की गई 15.55 लाख से अधिक की शासकीय राशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाए।
3. संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर गाज गिरे: इस पूरे भ्रष्टाचार और संरक्षण खेल में शामिल अन्य उच्च अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
देखना दिलचस्प होगा की
“क्या प्रशासन ऐसे महाभ्रष्ट सचिव पर कार्यवाही करेगा या कागजी जांच का खेल यूं ही चलता रहेगा? सरपंच संघ अब इस मामले में बड़े आंदोलन के मूड में नजर आ रहा है।”
उक्त मामले में सचिव दूबे से संपर्क करने की कोशिश की गई परंतु उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया!









