शासकीय आदेशों की उड़ाईं धज्जियां: रोक के बावजूद बारिश में बनवा डाला पुल, 40% राशि का आहरण

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : जनपद पंचायत मरवाही के अंतर्गत ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित गांव झिरना पोड़ी से पिपरिया पहुंचमार्ग पर शासकीय नियमों और प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार कर पुल निर्माण कराने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बारिश के मौसम में निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने जिस कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिखित निर्देश दिए थे, उसे पंचायत एजेंसी द्वारा पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया और धड़ल्ले से काम जारी रखा गया। इतना ही नहीं, नियमों की अवहेलना करते हुए इस अधूरे निर्माण के एवज में ग्राम पंचायत एजेंसी द्वारा 40% राशि का आहरण भी कर लिया गया है।
स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित भूमि स्वामी द्वारा मामले की शिकायत दर्ज कराने के बाद जब प्रशासनिक जांच की गई, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की परतें खुल गईं। मौके पर पाया गया कि पुल के हत्थे का निर्माण निजी किसान के खेत में लगभग 4 फीट अंदर तक कर दिया गया है, जिससे अवैध कब्जे की स्थिति बन गई है। तकनीकी रूप से भी निर्माण पूरी तरह गलत पाया गया; जिस स्थान पर यह नया पुल बनाया जा रहा है, वहां पानी की निकासी की कोई आवश्यकता ही नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि नवनिर्मित पुल से महज 5 मीटर नीचे पुराना पुल पहले से मौजूद है, जिसे पुराने तकनीकी सहायकों ने समझ-बूझकर बनवाया था। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि 15वें वित्त आयोग की शासकीय राशि का दुरुपयोग कर सरपंच और संबंधितों द्वारा केवल अपनी जेबें गर्म करने का काम किया गया है।

मामले में जनपद पंचायत मरवाही के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों का कहना है कि बरसात के दौरान RCC निर्माण कार्य करना मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD) मैनुअल तथा ग्रामीण सड़क नियमों के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है, क्योंकि इससे निर्माण की मजबूती खत्म हो जाती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी शासकीय निर्माण से पहले भूमि सीमांकन और तकनीकी स्वीकृति अनिवार्य होती है, और बिना सहमति निजी जमीन पर निर्माण करना भू-राजस्व संहिता का सीधा उल्लंघन है।
प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया है और पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक तकनीकी दल गठित कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और आहरित की गई राशि की रिकवरी भी होगी। इसके साथ ही प्रभावित किसान की जमीन का सीमांकन कर नुकसान का आकलन किया जाएगा। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने मांग की है कि पुल के दोनों तरफ एप्रोच रोड बनाकर इसे जल्द से जल्द आवागमन के लिए सुरक्षित और उपयोगी बनाया जाए।










