सुशासन की सरकार में ‘मौत का गड्ढा’! आखिर किसकी मौत का इंतज़ार कर रहा PWD विभाग? हल्की बारिश में पसान बस स्टैंड पर गड्ढे में गिरा बाइक सवार, पानी में उतरकर लोग ढूंढ़ते रहे मोबाइल

हल्की बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल
पसान। प्रदेश में सुशासन और बेहतर सड़कों के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन पसान बस स्टैंड की बदहाल सड़क उन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। मंगलवार सुबह हुई हल्की बारिश ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी। पानी से भरे गहरे गड्ढे में एक बाइक सवार अचानक जा गिरा। युवक तो किसी तरह संभल गया, लेकिन उसका मोबाइल पानी में समा गया।

मोबाइल की तलाश में गड्ढे में उतरे लोग, धान रोपाई जैसा दिखा नजारा
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बाइक सवार की मदद की। इसके बाद कई लोग पानी से भरे गड्ढे में उतरकर मोबाइल तलाशने लगे। सड़क पर बना यह दृश्य राहगीरों के लिए चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने कहा कि यह सड़क कम और धान का खेत ज्यादा नजर आ रही थी।

बस स्टैंड की सड़क बनी हादसों का अड्डा
स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों का कहना है कि बस स्टैंड के आसपास की सड़क लंबे समय से जर्जर पड़ी है। हल्की बारिश होते ही गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। नतीजा यह है कि रोजाना दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं, बल्कि लगातार हो रही लापरवाही का परिणाम है।

फंड की कमी का हवाला, लेकिन जनता की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?
यह सड़क कटघोरा अनुभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत आती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग के SDO ने फंड की कमी का हवाला देते हुए मरम्मत कार्य में असमर्थता जताई है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सड़क सुधारने के लिए बजट नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या विभाग केवल हादसों की गिनती करता रहेगा?
सुशासन की सरकार में बदहाल सड़कें क्यों?
प्रदेश की सुशासन सरकार विकास और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के दावे करती है। लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री एवं मंत्री अरुण साव के पास है। ऐसे में पसान बस स्टैंड जैसी महत्वपूर्ण जगह पर सड़क की यह दुर्दशा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। आखिर अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
बड़ा हादसा होने के बाद ही खुलेगी नींद?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज एक युवक गिरा और उसका मोबाइल गड्ढे में खो गया, लेकिन कल यही गड्ढा किसी की जान भी ले सकता है। यदि किसी स्कूली बच्चे, बुजुर्ग या किसी परिवार के कमाने वाले सदस्य के साथ बड़ी दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या तब भी फंड की कमी का हवाला दिया जाएगा?
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों, व्यापारियों और राहगीरों ने तत्काल सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और कोई बड़ा हादसा हुआ, तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी तरह संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
जनता का सीधा सवाल
आखिर किसकी मौत का इंतज़ार कर रहा है PWD विभाग?
क्या किसी की जान जाने के बाद ही सड़क की मरम्मत होगी?
क्या सुशासन के दावे सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं, जबकि ज़मीन पर जनता गड्ढों में गिरने को मजबूर है?
अब देखना यह है कि लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हैं या फिर अगली बारिश किसी और बड़े हादसे की वजह बनेगी।









