GPM: “ठेंगा दिखाकर बना दिया पुल!” CEO के आदेश की धज्जियां, एक बिल से 4 लाख का खेल, क्या अब होगी कार्यवाही सरपंच और संकल्प मेटल वाले पर..?

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : 15वें वित्त का पैसा आया था गांव में “विकास की गंगा” बहाने… लेकिन ग्राम पंचायत नरौर में उससे “भ्रष्टाचार की गंगा” बहा दी गई। ग्राम झिरना पोड़ी का मामला अब पूरे GPM जिले में चर्चा का विषय बन गया है। वजह? CEO के लिखित आदेश को कचरे में फेंककर पुल बना देना, सरकारी जमीन बताकर निजी खेत में अतिक्रमण और एक ही बिल से दो बार पैसा निकाल लेना।
“जागो अधिकारी जागो” – पूरा मामला क्या है? सीन 1: आदेश आया, ठेंगा दिखाया :-

CEO मरवाही और इंजीनियर खुद मौके पर पहुंचे। बरसात में घटिया काम देखकर “तुरंत निर्माण रोकें” का लिखित आदेश दिया। लेकिन सरपंच और सरपंच पति पर कोई असर नहीं। आरोप है कि डर-भय छोड़कर जल्द_जल्द काम पूरा करवा दिया। ग्राम पंचायत ने कानून को खुलेआम “ठेंगा” दिखाया।
सीन 2: जमीन सरकारी, कब्जा निजी :-

पुल बना भूमि स्वामी के खेत में 4 फिट अंदर ग्रामीणों का आरोप ग्राम झिरना पोड़ी में”सरकारी भूमि बताकर निजी भूमि पर अतिक्रमण करना यहां आम बात हो गई है”जिसका जीता जगता उदाहरण पुल निर्माण है। बिना पटवारी रिपोर्ट, बिना तहसीलदार अनुमति के निर्माण।
सीन 3: एक बिल, दो भुगतान, लाखो का घोटाला :- खेल का मास्टरमाइंड बना बिल नं. 713, फर्म: संकल्प मेटल एण्ड स्टील, बस स्टैण्ड-निमधा
पहला भुगतान : RCC पुलिया के नाम 2 लाख दूसरा भुगतान : नाली निर्माण के नाम 2 लाख
दोनों का पैसा XV Finance – Tied Grant से निकला। यानी 2 लाख के बिल से 4 लाख डकार लिए गए।
अब क्या होगा? 3 सवाल जो पूरे जिले को हिला रहे हैं :-
1 क्या सरपंच पति की “सुर्खियों में रहने” की आदत अब कार्यवाही और FIR तक पहुंचेगी..?
2 क्या इस बार “संकल्प मेटल” का फर्जी बिल लगाना महंगा पड़ेगा..? लाइसेंस रद्द और क्या..? FIR की कार्यवाही होगी।
3 या फिर हमेशा की तरह अधिकारी सोते रहेंगे और 15वें वित्त से सिर्फ “गुमराह की गंगा” बहेगी?
ग्रामीण सीधे पूछ रहे हैं क्या भोली जनता को इसी तरह अनुचित जगह पुल-नाली बनाकर बेवकूफ बनाकर झूठे सपने दिखाते रहेंगे जहां पानी का आवक संभव ही नहीं है और क्या शासकीय पैसे के दोहन होते ही रहेगा ?”
कानून क्या कहता है :-
छ.ग. पंचायत राज अधिनियम CEO के आदेश की अवहेलना छ.ग. वित्तीय नियम फंड डायवर्जन और फर्जी वाउचर गांव की मांग एक ही”जांच करो, जेल भेजो, पैसा वसूलो” ग्रामीणों ने कलेक्टर GPM से मांग की है कि अब से झिरना पोड़ी में हर निर्माण से पहले पटवारी प्रतिवेदन + तहसीलदार अनुमति अनिवार्य की जाए। वरना अधिकारियों को गुमराह करने का ये खेल चलता रहेगा। अब देखना है कि प्रशासन “विकास की गंगा” बहाता है या फाइलों में सब दबा देता है।










