GPM: झिरना पोड़ी का “ऐतिहासिक पुल” वाली वायरल वीडियो कितनी सच, कितनी गुमराह? देखे जमीनी हकीकत

गौरेला पेंड्रा मरवाही :- सोशल मीडिया पर इन दिनों ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित ग्राम झिरना पोड़ी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि _”गांव में पहली बार ऐतिहासिक पुल बना है, अब किसानों की कोठी धान से भर जाएगी” और _”कुछ लड़के जनता को गुमराह कर रहे हैं”।
👉लेकिन पड़ताल में हकीकत कुछ और ही निकली 👇

>- वायरल वीडियो के 3 दावे vs जमीनी हकीकत :-
1. दावा -: “गांव का पहला ऐतिहासिक पुल, किसानों को फायदा” :-

हकीकत -: ग्रामीणों का आरोप है कि पुल भूमि स्वामी के खेत में 4 फिट अंदर अतिक्रमण करके बनाया गया है। और सबसे बड़ा सवाल – “जहां पानी का आवक ही नहीं है, वहां पुल क्यों?” बिना सर्वे के निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं।
2. दावा -: “बरसात में निर्माण सही है” :-

हकीकत -: CEO मरवाही और इंजीनियर खुद मौके पर जाकर बरसात में घटिया काम के कारण *लिखित आदेश देकर काम रुकवा चुके हैं। नियम के खिलाफ जाकर निर्माण हुआ।
3 दावा :- “कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं” :-
>- हकीकत -: गुमराह कौन कर रहा है? दस्तावेज बताते हैं कि बिल नं. 713 से 2 बार भुगतान हुआ है।
>- एक बार -: `RCC पुलिया निर्माण – झिरना पोड़ी`
>- दूसरी बार -: `नाली निर्माण – ओमप्रकाश मरावी के खेत के पास`
एक ही 2 लाख के बिल से कुल 4 लाख निकाल लिए गए। भुगतान 15वें वित्त की राशि से हुआ है।
>: ये किस तरह का “विकास” है? :-
1.नियम तोड़े -: CEO के आदेश के बाद भी SDO मोहले ने बिल पास किया।
2.फंड डायवर्जन -: पुलिया/नाली का पैसा Water Supply मद में दिखाया गया।
3.फर्जीवाड़ा :- एक ही बिल से दो भुगतान – BNS की धारा और वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन।
इस तरह की वायरल वीडियो सिर्फ लोगों को गुमराह करने और असल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए बनाई जाती हैं।
गांव का विकास होना चाहिए, लेकिन पारदर्शिता और नियम-कानून के साथ। अतिक्रमण, फर्जी बिल और कमीशनखोरी से नहीं। ग्रामीणों की मांग कलेक्टर GPM से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।









