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‘मोदी ने रमजान में युद्ध छिड़ने पर जताया खेद’, राष्ट्रपति पेजेश्कियन से बातचीत पर ईरान का बयान, BRICS पर बड़ी मांग

ईरान ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री मोदी ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान युद्ध छिड़ने पर खेद व्यक्त किया है और उम्मीद जताई कि नया साल (नवरोज) इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अमन-चैन लेकर आएगा।’ इस दौरान मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘भारत कूटनीति के मार्ग पर चलते हुए एक रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा ताकि संघर्ष का और ज्यादा बढ़ना किसी भी पक्ष के हित में न हो।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कल देर शाम ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत कूी थी। इसके बाद आज सुबह में ईरान की तरफ से एक रीडऑउट जारी किया गया है। ईरान की सरकारी मेहर न्यूज के मुताबिक इस रीडऑउट में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का ब्योरा दिया गया है।

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‘पेजेश्किन ने भारत के रूख की सराहना की’

इस रीडऑउट में कहा गया है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कयान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता के बाद युद्ध से जुड़े ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा की। इस दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ‘भारत सरकार और वहां की जनता की सराहना की जिन्होंने इस्लामिक गणराज्य के प्रति सहानुभूति दिखाई है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘ईरान ने हमेशा एक मित्र देश के तौर पर भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व दिया है।’

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रीडऑउट में कहा गया है कि ‘इस फोन कॉल के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियन और प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में युद्ध से जुड़े ताजा घटनाक्रमों और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की कायरतापूर्ण आक्रामकता के बाद पैदा हुए इसके गंभीर परिणामों पर अपने विचार साझा किए। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के संतुलित और रचनात्मक रुख की सराहना की साथ ही तनाव कम करने के उसके प्रयासों की भी तारीफ की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु वार्ता के बीच ही अमेरिका और जायोनी शासन ने एक बार फिर ईरान पर हमला किया।

प्रेस रिलीज में कहा गया है कि ‘पेजेश्कियन ने इस बात को रेखांकित किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन है। इस आक्रामकता के कारण इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और आम नागरिकों को शहादत मिली। इनमें मीनाब के एक प्राथमिक स्कूल के 168 से ज़्यादा बेकसूर स्कूली बच्चे भी शामिल थे।’

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BRICS की अध्यक्षता भारत के पास, ईरान ने क्या मांग की?

इस प्रेस रिलीज के मुताबिक ईरान के राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ‘ईरान के अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने के मामले में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए अपराधों के बावजूद ईरान BRICS और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के दायरे में भारत और अन्य मित्र देशों के साथ सहयोग और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’ उन्होंने इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए BRICS की सक्रिय और रचनात्मक भूमिका की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

भारत-ईरान विदेश मंत्रियों की चौथी बार बातचीत

इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने आज दोपहर कहा है कि भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच चौथी बार टेलीफोन पर बात हुई है। इस बार हुई बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने विशेष रूप से BRICS की भूमिका का मुद्दा उठाया। भारत इस साल BRICS का अध्यक्ष है जिसने अब तक चल रहे संघर्ष पर कोई बयान जारी नहीं किया है। विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने BRICS के लिए यह “आवश्यक माना” कि वह “मौजूदा समय में क्षेत्र और दुनिया में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने में एक रचनात्मक भूमिका निभाए।”

इस दौरान अराघची ने अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों तथा मंचों द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता की निंदा किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बहुपक्षीय सहयोग के विस्तार के एक मंच के रूप में ब्रिक्स (BRICS) के महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस समूह को वर्तमान समय में क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता तथा सुरक्षा को बनाए रखने में एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

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