जब कलम पर हमला होगा, तो लोकतंत्र की आवाज कौन उठाएगा?
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर 1 दिसंबर को दिल्ली में निर्णायक हुंकार — जंतर-मंतर पर देशभर के पत्रकारों के जुटने का आह्वान

नई दिल्ली। पत्रकारिता को लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाता है, लेकिन जब इसी प्रहरी की सुरक्षा खतरे में पड़ने लगे तो सवाल सिर्फ पत्रकार का नहीं रहता—सवाल पूरे लोकतंत्र की सुरक्षा का बन जाता है।
पत्रकारों पर हमले, धमकियां, दबाव और उत्पीड़न की घटनाओं के बीच अब पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर देशभर में आवाज बुलंद करने की तैयारी है। 1 दिसंबर 2026, मंगलवार को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पत्रकारों के बड़े जुटान और प्रदर्शन का आह्वान किया गया है।

🔥 अब सवाल समझौते का नहीं, सुरक्षा के अधिकार का है –
• पत्रकारों का कहना है कि खबर लिखना अपराध नहीं है।
सवाल पूछना अपराध नहीं है।
• सच सामने लाना अपराध नहीं है।

• लेकिन यदि सच लिखने और जनहित की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को ही डर, धमकी और हमले का सामना करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
इसीलिए मांग उठ रही है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि पत्रकार बिना भय और दबाव के अपना दायित्व निभा सकें।

जंतर-मंतर से उठेगी एक आवाज—“पत्रकार सुरक्षित तो लोकतंत्र सुरक्षित”
1 दिसंबर को जंतर-मंतर पर होने वाला यह जुटान सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के भविष्य को लेकर सामूहिक आवाज बनने का संदेश दे रहा है।
अभियान से जुड़े आह्वान में देशभर के पत्रकारों से दिल्ली पहुंचकर अपनी एकजुटता दर्ज कराने की अपील की गई है।
⚠️ पत्रकारों की प्रमुख मांगें –
• पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।
• पत्रकारों पर हमले और धमकियों के मामलों में कठोर एवं त्वरित कार्रवाई हो।
• पत्रकारों को काम के दौरान सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
• पत्रकारों को दबाने, डराने और हिंसा के जरिए चुप कराने की कोशिशों पर प्रभावी कानूनी रोक लगे।
• स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए।
🖊️ कलम की ताकत को सुरक्षा चाहिए –
एक पत्रकार की कलम केवल खबर नहीं लिखती—वह समाज के सवालों को आवाज देती है, व्यवस्था से जवाब मांगती है और आम आदमी की समस्याओं को सामने लाती है।
अगर कलम डर गई, तो सवाल कौन पूछेगा?
• अगर पत्रकार चुप हो गया, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा?
• और अगर सच लिखने वाला ही असुरक्षित हो गया, तो लोकतंत्र की रक्षा कौन करेगा?
इसी सवाल के साथ पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर 1 दिसंबर को जंतर-मंतर पर एकजुट होने का आह्वान किया गया है।

“चुप मत बैठिए… चलिए जंतर-मंतर!”
दिनांक: 1 दिसंबर 2026, मंगलवार
स्थान: जंतर-मंतर, नई दिल्ली
समय: सुबह 11 बजे
यह लड़ाई किसी एक पत्रकार की नहीं—हर उस कलम की है, जो सच लिखने का साहस रखती है।
पत्रकार सुरक्षित होंगे, तभी निर्भीक पत्रकारिता बचेगी।
निर्भीक पत्रकारिता बचेगी, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा।









