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कटघोरा–बिलासपुर–अंबिकापुर NH पर निर्माणों की बाढ़! सुप्रीम कोर्ट के 75 मीटर वाले आदेश के बाद मचा हड़कंप, सैकड़ों निर्माणों की वैधता पर उठे सवाल

एक तरफ बन रहा फोरलेन, दूसरी तरफ हाईवे किनारे खड़े हो रहे सैकड़ों निर्माण

कटघोरा। कटघोरा–बिलासपुर–अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ओर करोड़ों रुपये की लागत से सड़क को बेहतर और सुरक्षित बनाने का काम तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास बड़ी संख्या में निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से जारी हैं। हाईवे किनारे जगह-जगह मकान, दुकान, होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्माण किए जाने की स्थिति अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सड़क चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण के बीच जिस तेजी से नए निर्माण आकार ले रहे हैं, उससे आने वाले समय में यातायात, अतिक्रमण, वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश-निकास और सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी समस्या पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब हर नए निर्माण पर उठेगी नजर

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राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास अनियंत्रित निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने In Re: Phalodi Accident मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। 13 अप्रैल 2026 के फैसले में सड़क सुरक्षा और हाईवे के आसपास भूमि उपयोग एवं विकास को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है। इसी फैसले में हाईवे की सेंटर लाइन से दूरी के आधार पर आवासीय और व्यावसायिक भूमि उपयोग परिवर्तन को लेकर मानक निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में कटघोरा–बिलासपुर–अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास तेजी से हो रहे नए निर्माण अब जांच के दायरे में आने की मांग कर रहे हैं।

75 मीटर का मतलब हर मकान-दुकान अवैध नहीं, लेकिन नए निर्माणों की जांच जरूरी

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यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रीय राजमार्ग से 75 मीटर के भीतर मौजूद हर पुराना मकान या दुकान स्वतः अवैध हो गया है। किसी निर्माण की वैधता तय करने के लिए उसकी निर्माण तिथि, भूमि उपयोग, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, स्वीकृत नक्शा और राष्ट्रीय राजमार्ग की ROW सीमा सहित अन्य नियमों की जांच आवश्यक होगी। लेकिन सवाल उन नए निर्माणों को लेकर है जो हाईवे के विकास कार्य के बीच तेजी से खड़े हो रहे हैं। यदि नए व्यावसायिक निर्माण बिना आवश्यक अनुमति या भूमि उपयोग परिवर्तन के किए जा रहे हैं, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

होटल, ढाबे और दुकानों की कतार—किसकी अनुमति से हो रहा निर्माण?

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राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास निर्माण को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल अनुमति और भूमि उपयोग का है। हाईवे किनारे यदि नए होटल, ढाबे, दुकान, व्यावसायिक परिसर अथवा अन्य संरचनाएं बनाई जा रही हैं तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन निर्माणों के लिए अनुमति किस विभाग से ली गई है? जमीन का उपयोग क्या है? क्या व्यावसायिक उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है? क्या निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग की ROW से बाहर है? वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए क्या व्यवस्था स्वीकृत है? और क्या संबंधित निर्माण सड़क सुरक्षा के निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं?

सड़क सुरक्षित बनाने करोड़ों खर्च, फिर उसी सड़क के किनारे खतरा क्यों?

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने और यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है। लेकिन यदि सड़क के दोनों ओर बिना समुचित नियोजन के नए निर्माण बढ़ते गए तो भविष्य में यही निर्माण यातायात की गति को प्रभावित करने, जाम की स्थिति पैदा करने और दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकते हैं। हाईवे पर अचानक खुलने वाले रास्ते, दुकानों के सामने खड़े वाहन, ढाबों में जाने वाले भारी वाहन और अनियंत्रित कट सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

प्रशासन करे स्थलवार जांच, सामने आए पूरी तस्वीर

अब जरूरत केवल बयानबाजी की नहीं बल्कि जमीन पर कार्रवाई और जांच की है। कटघोरा से लेकर बिलासपुर और अंबिकापुर की दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर चल रहे नए निर्माणों का स्थलवार सर्वे कराया जाना चाहिए। प्रत्येक निर्माण की निर्माण तिथि, भूमि का रिकॉर्ड, भूमि उपयोग, भवन अनुमति, संबंधित विभाग की स्वीकृति और हाईवे की सेंटर लाइन तथा ROW से दूरी दर्ज की जानी चाहिए। इससे साफ हो सकेगा कि कौन से निर्माण पुराने और वैध हैं तथा किन निर्माणों में नियमों के उल्लंघन की आशंका है।

राजस्व से लेकर हाईवे प्राधिकरण तक—जिम्मेदारी तय करने का वक्त

इस पूरे मामले में केवल एक विभाग को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा। राजस्व विभाग, स्थानीय निकाय, नगर पंचायत अथवा ग्राम पंचायत, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर रिकॉर्ड की जांच करनी होगी। यदि किसी निर्माण को अनुमति दी गई है तो अनुमति की प्रक्रिया भी सार्वजनिक जांच के दायरे में आनी चाहिए। आखिर जब राष्ट्रीय राजमार्ग का विस्तार पहले से चल रहा है, तब उसके आसपास नए निर्माणों को लेकर निगरानी व्यवस्था कितनी सक्रिय थी—यह सवाल भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।

सैकड़ों निर्माणों पर अब प्रशासन की नजर कब?

कटघोरा–बिलासपुर–अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यदि सैकड़ों की संख्या में निर्माण कार्य वास्तव में चल रहे हैं, तो प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सवाल किसी वैध मकान या पुराने व्यवसाय को उजाड़ने का नहीं, बल्कि नए निर्माणों की वैधता और भविष्य की सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने का है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब यह देखना जरूरी हो गया है कि हाईवे के आसपास विकास नियमों के अनुसार हो रहा है या फिर सड़क बनने से पहले ही उसके दोनों ओर अनियोजित निर्माणों का जाल तैयार किया जा रहा है।

अब कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए कार्रवाई

कटघोरा–बिलासपुर–अंबिकापुर NH पर चल रहे निर्माणों को लेकर अब प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर सकती है। यदि निर्माण वैध हैं तो संबंधित विभाग खुलकर स्थिति स्पष्ट करें और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हो रही है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। राष्ट्रीय राजमार्ग जनता की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, न कि बिना नियोजन के निर्माणों की कतार खड़ी करने के लिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्वे और जांच कराता है या फिर सड़क के साथ-साथ निर्माणों का यह सिलसिला भी यूं ही बढ़ता रहता है।

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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