पोड़ी उपरोड़ा: बीजाडांड की शासकीय भूमि मामले में अब हाईकोर्ट का रुख करेंगे शिकायतकर्ता! जांच में देरी से बढ़ी नाराजगी, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कोरबा/पसान। ग्राम बीजाडांड की शासकीय भूमि से जुड़े कथित कब्जे, नामांतरण और रजिस्ट्री के मामले में प्रशासनिक जांच लंबे समय से लंबित रहने के आरोपों के बीच अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने की तैयारी में है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सक्षम अधिकारियों के समक्ष दस्तावेजों सहित शिकायत प्रस्तुत करने के बावजूद जांच अब तक निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंची है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर राहत नहीं मिलने पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है।
शिकायत में खसरा क्रमांक 8/1, 8/11, 8/12, 8/13, 8/14, 8/15 एवं 8/16 की भूमि को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भूमि शासकीय भूमि एवं “बड़े झाड़ जंगल मद” से संबंधित रही है, जबकि कुछ अभिलेखों में निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज होने को लेकर आपत्ति जताई गई है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले में दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद अधिकारियों की ओर से अब तक केवल “जांच जारी है” का जवाब दिया जा रहा है। यही वजह है कि अब प्रशासनिक जांच की गति और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हाईकोर्ट में क्या होगी मांग?

मामला न्यायालय तक पहुंचने की स्थिति में शिकायतकर्ता द्वारा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच, राजस्व अभिलेखों के परीक्षण और कथित अनियमितताओं की न्यायिक निगरानी में जांच जैसी मांगें उठाई जा सकती हैं। हालांकि हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाने वाली याचिका में अंतिम मांगें याचिकाकर्ता के विधिक सलाह के अनुसार तय होंगी।
प्रशासन के लिए बढ़ेगी चुनौती

शासकीय भूमि से जुड़े मामले में यदि रिकॉर्ड में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं यदि शिकायत में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं, तो जांच के निष्कर्ष सामने रखकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। अब मामला हाईकोर्ट तक जाने की तैयारी के बाद प्रशासन की भूमिका पर निगाहें और ज्यादा टिक गई हैं। क्या जांच पूरी कर प्रशासन खुद सच सामने लाएगा, या फिर शिकायतकर्ता को न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।









