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कोरबा के पाली में पोषण आहार पर उठे गंभीर सवाल, अब PM पोर्टल तक पहुंची शिकायत! रेडी टू ईट में कथित कमीशन के आरोपों से मचा हड़कंप

बच्चों और अन्य हितग्राहियों के हिस्से के पोषण आहार में कथित कटौती का आरोप; परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी सवाल—शिकायत के बाद निष्पक्ष जांच की मांग

कोरबा/पाली। महिला एवं बाल विकास विभाग की पाली परियोजना में संचालित पूरक पोषण आहार योजना को लेकर उठे गंभीर सवाल अब प्रधानमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंच गए हैं। रेडी टू ईट पोषण आहार के वितरण में कथित अनियमितता, हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में कम मात्रा में वितरण तथा शेष पैकेटों पर कथित कमीशन के आरोपों को लेकर PM पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पाली परियोजना के विभिन्न सेक्टरों की आंगनबाड़ियों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए निर्धारित रेडी टू ईट पोषण आहार के वितरण में अनियमितता की जा रही है। आरोपों के अनुसार कुछ स्थानों पर दर्ज हितग्राहियों की संख्या के मुकाबले कथित तौर पर कम मात्रा में पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है, जबकि शेष पैकेटों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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मामले में प्रति पैकेट कथित ₹10 कमीशन दिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा विभागीय स्तर पर पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि शिकायत में पूरे मामले की दस्तावेजी जांच और भौतिक सत्यापन की मांग की गई है।

आपूर्ति में कमी से शुरू हुआ मामला, अब जांच की मांग तक पहुंचा

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बीते सप्ताह पाली परियोजना के पोड़ी, सिल्ली, लाफा, माखनपुर, सपलवा सहित कई क्षेत्रों में रेडी टू ईट पोषण आहार की आपूर्ति को लेकर सवाल उठे थे। आरोप है कि संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों में निर्धारित समय पर पोषण आहार उपलब्ध नहीं कराया गया। मामला सामने आने के बाद संबंधित क्षेत्रों में आनन-फानन में पोषण आहार पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई।

अब PM पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और गंभीर हो गई है।

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करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों के मासिक भुगतान का हिसाब जरूरी

सूत्रों के अनुसार पाली परियोजना के अंतर्गत रेडी टू ईट के लिए संबंधित समूह को प्रतिमाह लगभग 20 से 22 लाख रुपये के भुगतान की बात सामने आ रही है। ऐसे में जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह होना चाहिए कि शासन द्वारा जिन हितग्राहियों के नाम और संख्या के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, उनके अनुपात में वास्तव में कितनी मात्रा में रेडी टू ईट तैयार, परिवहन और वितरित किया गया।

जांच में उत्पादन रजिस्टर, उठाव रिकॉर्ड, परिवहन विवरण, सेक्टरवार आपूर्ति, आंगनबाड़ीवार स्टॉक रजिस्टर और हितग्राहीवार वितरण का मिलान किया जाना जरूरी है।

परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर की निगरानी भी सवालों के घेरे में

यदि रिकॉर्ड में पूर्ण मात्रा में पोषण आहार वितरण दर्ज है, लेकिन मौके पर भौतिक सत्यापन के दौरान मात्रा कम मिलती है, तो मामला गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता का रूप ले सकता है।

ऐसे में जांच सिर्फ रेडी टू ईट आपूर्तिकर्ता समूह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगरानी एवं वितरण प्रक्रिया में भूमिका की भी जांच की आवश्यकता होगी।

PM पोर्टल की शिकायत के बाद अब प्रशासन की परीक्षा

अब जबकि मामला PM पोर्टल तक पहुंच चुका है, देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायत पर किस स्तर की जांच करता है। क्या केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर मामले का निराकरण किया जाएगा या फिर वास्तविक आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बिना पूर्व सूचना के भौतिक सत्यापन कराया जाएगा?

क्योंकि इस मामले में असली तस्वीर तभी सामने आएगी, जब पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड का मिलान वास्तविक वितरण से किया जाएगा।

सवाल अब सिर्फ रेडी टू ईट के पैकेटों का नहीं, बल्कि उन बच्चों और महिलाओं के पोषण का है, जिनके नाम पर शासन द्वारा सार्वजनिक धन खर्च किया जा रहा है। PM पोर्टल पर शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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