PM आवास योजना में कथित घोटाले के बाद धमकी का आरोप! शिकायतकर्ता को दबाव, पत्रकारों को खबर लगाने से रोकने की कोशिश; जनपद सदस्य समेत अन्य के खिलाफ SP को दिया जाएगा आवेदन
भदौरा के 29 हितग्राहियों पर सवालों के बीच नया विवाद—शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप, धमकी देने वालों के नाम पुलिस अधीक्षक को सौंपने की तैयारी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्राम पंचायत भदौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उठे सवाल अब प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर पुलिस शिकायत तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। 29 हितग्राहियों की पात्रता को लेकर शिकायत में पक्के एवं डबल स्टोरी मकान, ट्रैक्टर, कार, 2.5 एकड़ से अधिक जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़े दावे किए गए हैं। वहीं ₹40 हजार से लेकर ₹1.20 लाख तक राशि जारी अथवा निकाले जाने के दावों ने भी योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच शिकायतकर्ता से शिकायत वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है तथा मामले को लेकर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को भी कथित तौर पर धमकाया जा रहा है। अब पत्रकार की ओर से धमकी देने के आरोपों से जुड़े लोगों के नामों का उल्लेख करते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित आवेदन देने की तैयारी की जा रही है। आरोपों में एक जनपद सदस्य समेत अन्य लोगों के नाम शामिल किए जाने की बात सामने आई है।

PM आवास की शिकायत बनी दबाव की वजह?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जैसे ही भदौरा में PM आवास योजना के लाभार्थियों को लेकर सवाल उठाए गए, उसके बाद कथित तौर पर उसे शिकायत वापस लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा। आरोप है कि उसे मामले को आगे नहीं बढ़ाने के लिए कहा गया।

अब सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप गलत हैं तो उनका जवाब जांच और दस्तावेजों से दिया जाना चाहिए। शिकायत वापस लेने का कथित दबाव क्यों बनाया जा रहा है?
पत्रकारों को भी कथित धमकी—खबर रोकने की कोशिश?

मामले की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को भी खबर प्रकाशित नहीं करने के लिए कथित धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह मामला केवल पंचायत की योजना संबंधी अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा।
पत्रकारों को खबर रोकने के लिए धमकाने का आरोप मीडिया की स्वतंत्रता से भी जुड़ा गंभीर विषय है। आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस जांच जरूरी होगी।
जनपद सदस्य समेत अन्य के नाम SP को दिए जाएंगे
मामले में अब शिकायतकर्ता की ओर से कथित धमकी देने वालों के नामों और घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए SP को लिखित शिकायत सौंपने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि आवेदन में एक जनपद सदस्य सहित अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया जाएगा।
पुलिस के सामने अब यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में धमकी या दबाव दिया गया था या नहीं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की मांग उठेगी।
अब दो मोर्चों पर होगी जांच
भदौरा मामले में अब प्रशासन के सामने दो अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए सवाल हैं।
पहला—PM आवास योजना के 29 कथित लाभार्थियों की पात्रता और भुगतान की वास्तविकता क्या है?
दूसरा—शिकायतकर्ता और पत्रकारों को कथित रूप से दबाव या धमकी देने के पीछे कौन लोग हैं?
दोनों मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।
CEO की जांच से लेकर SP के दरवाजे तक पहुंचा मामला
PM आवास योजना में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए जनपद पंचायत CEO की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, वहीं धमकी के आरोपों को लेकर अब पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत पहुंचने की तैयारी है।
यदि PM आवास के आरोप गलत हैं तो जांच में स्थिति साफ हो जाएगी। लेकिन यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो लाभार्थियों से लेकर सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में आनी चाहिए।
और यदि शिकायतकर्ता व पत्रकारों को धमकी देने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो पुलिस को भी निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी।
सवाल अब बड़ा है—आवास योजना की जांच से डर क्यों और शिकायतकर्ता को पीछे हटाने की जरूरत क्यों?
भदौरा का मामला अब सिर्फ सरकारी आवास योजना की पात्रता का विवाद नहीं रह गया है। एक तरफ 29 नामों पर गंभीर सवाल हैं, दूसरी तरफ शिकायत वापस लेने के दबाव और पत्रकारों को धमकी के आरोप हैं।
अब देखना होगा कि जनपद CEO योजना की जांच कितनी निष्पक्षता से कराते हैं और SP के पास पहुंचने वाले आवेदन पर पुलिस कितनी गंभीरता से संज्ञान लेती है।
सच जांच से सामने आएगा—दबाव या धमकी से नहीं।









