भालू परिवार की मौत पर बवाल: हादसा, लापरवाही या साक्ष्य मिटाने की साजिश?बिजली विभाग का वन विभाग पर गंभीर आरोप
आंधी-तूफान बना हादसे की वजह या लापरवाही छुपाने की कोशिश?

कोरबा : कटघोरा वन मंडल के केंदई वन परिक्षेत्र में मादा भालू और उसके दो शावकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। शुरुआत में यह मामला एक सामान्य वन्यजीव दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब इसमें प्रशासनिक लापरवाही, विभागीय टकराव और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर आरोप जुड़ते जा रहे हैं। घटना के बाद से ही अलग-अलग विभागों के दावों और आरोपों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।
आंधी-तूफान के बीच हुआ हादसा या सिस्टम की नाकामी?

बताया जा रहा है कि 26 मार्च को क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण एक पेड़ बिजली लाइन पर गिर गया था। पेड़ गिरने से तार टूटकर जमीन पर आ गए और उसी दौरान वहां से गुजर रहा भालू परिवार उसकी चपेट में आ गया। इस दर्दनाक घटना में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
बिजली कर्मचारियों की यूनियन का दावा है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक आपदा का परिणाम है, जिसमें किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं मानी जा सकती। उनका कहना है कि लाइन क्षतिग्रस्त होने की सूचना समय पर नहीं मिल पाई, जिसके चलते सुधार कार्य नहीं हो सका।

बिजली कर्मचारी पर कार्रवाई से भड़की यूनियन
घटना के बाद बिजली विभाग के एक कर्मचारी पर कार्रवाई की गई, जिसे लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने कड़ा विरोध जताया है। यूनियन का कहना है कि बिना पूरी जांच किए किसी एक कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराना अन्यायपूर्ण है। इसी के विरोध में यूनियन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई को वापस लेने की मांग की है और इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया है।

वन विभाग पर गंभीर आरोप: क्या सबूत मिटाए गए?
मामले ने उस समय और गंभीर मोड़ ले लिया जब यूनियन ने वन विभाग के अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। यूनियन का दावा है कि घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे बिजलीकर्मी ने जो फोटो और वीडियो साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड किए थे, उन्हें वन विभाग के अधिकारियों ने मोबाइल से डिलीट करवा दिया
यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सच्चाई छुपाने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
प्रशासन के सामने रखी गई अहम मांगें
यूनियन ने इस पूरे मामले में प्रशासन से उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही बिजली कर्मचारी पर दर्ज केस को तत्काल वापस लेने, सूचना देने में देरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई है। इन मांगों के जरिए यूनियन यह स्पष्ट करना चाहती है कि दोष तय करने से पहले पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच जरूरी है।
जांच पर टिकी निगाहें, सच आने का इंतजार
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है और सभी पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है — क्या यह वाकई प्राकृतिक आपदा थी या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की चूक और लापरवाही छुपी हुई है। साथ ही, साक्ष्य मिटाने के आरोप कितने सही हैं, यह भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पूरे मामले पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं और लोग सच सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।









