Katghora: चार कमरों में पहली से 12वीं तक का स्कूल! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा जय भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल?

चार कमरों में पहली से 12वीं तक का स्कूल! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा जय भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल?
कटघोरा। कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत नवागांव में संचालित जय भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय स्तर पर की गई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि विद्यालय वर्षों से किराए के भवन के महज चार कमरों में पहली से लेकर 12वीं तक की कक्षाओं का संचालन कर रहा है। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह केवल एक स्कूल की अनियमितता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और विभागीय जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

किराए के चार कमरे… और दावा पहली से 12वीं तक की पढ़ाई का
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस भवन में विद्यालय संचालित हो रहा है, वहां उपलब्ध कमरों और संसाधनों को देखते हुए पहली से 12वीं तक की कक्षाओं का संचालन कैसे किया जा रहा है, यह अपने आप में जांच का विषय है। यदि वास्तव में इतनी सीमित व्यवस्था में सभी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, तो यह देखना जरूरी है कि आवश्यक शैक्षणिक एवं आधारभूत मानकों का पालन किस प्रकार किया जा रहा है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
बताया जा रहा है कि मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद अब तक विभाग की ओर से जांच के परिणाम या किसी ठोस कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। इससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।

शिक्षा विभाग की सख्ती के दावों की होगी परीक्षा
हाल के दिनों में कोरबा जिले में शिक्षा विभाग बिना मान्यता अथवा नियमों का उल्लंघन कर संचालित निजी विद्यालयों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कह चुका है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि जय भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल की शिकायत पर विभाग कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और क्या जांच पूरी पारदर्शिता से की जाती है।
बच्चों का भविष्य सबसे बड़ा सवाल
किसी भी विद्यालय में प्रवेश लेने वाले अभिभावकों की पहली चिंता बच्चों का भविष्य होता है। यदि किसी विद्यालय की मान्यता, अधोसंरचना या दस्तावेजों को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो सबसे अधिक चिंता विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की बढ़ जाती है। इसलिए इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
अब जवाब देने की बारी विभाग की
अब सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग के सामने है। यदि विद्यालय पूरी तरह नियमों के अनुरूप संचालित हो रहा है तो विभाग को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लेकिन यदि शिकायतों में दम पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई कर यह संदेश देना होगा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
(नोट: इस खबर में उल्लिखित आरोप शिकायतों पर आधारित हैं। विद्यालय की मान्यता निरस्त किए जाने का कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यदि विद्यालय प्रबंधन अपना पक्ष देना चाहता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)









