KORBA: स्कूल या वसूली का अड्डा? अभिभावक डटा तो ‘त्रिलोकी पब्लिक स्कूल’ के संचालक आशु धनोंदिया को लौटाने पड़े ₹29,330
बच्चों को पढ़ाने में नहीं, लूटने में लगा है स्कूल संचालक” — अतिरिक्त फीस लौटने के बाद अभिभावकों में नाराज़गी

“उंगली टेढ़ी किए बिना घी नहीं निकलता…” संचालक आशु धनोंदिया को दफ्तर बुलाकर सौंपना पड़ा चेक
कटघोरा।निजी स्कूलों की मनमानी और फीस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभिभावकों के लिए कटघोरा से एक बड़ा और तीखा संदेश सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए, त्रिलोकी पब्लिक स्कूल के संचालक आशु धनोंदिया के खिलाफ फीस वसूली को लेकर उठे विवाद में आखिरकार स्कूल प्रबंधन को ₹29,330 की राशि चेक के माध्यम से वापस करनी पड़ी।

यह वापसी किसी स्वैच्छिक राहत का परिणाम नहीं, बल्कि अभिभावक के लगातार विरोध, शिकायतों और अपने अधिकारों के लिए किए गए कड़े संघर्ष के बाद संभव हुई है।
जब सवाल उठे, तो संचालक आशु धनोंदिया ने थमाया ₹29,330 का चेक

मामला छात्र हर्षित अग्रवाल के शुल्क से संबंधित है। स्कूल के आधिकारिक दस्तावेज (पत्र क्रमांक: TPSK/26-27/453) के अनुसार, छात्र के माता-पिता (श्री प्रवीण अग्रवाल एवं श्रीमती पूजा अग्रवाल) से कुल ₹41,900 (ट्यूशन और ट्रांसपोर्ट फीस) प्राप्त किए गए थे।
जब अभिभावक ने इस फीस वसूली पर कड़ा विरोध जताया और प्रशासनिक शिकायत की, तो प्रबंधन को शुल्क संरचना की समीक्षा करनी पड़ी। इसके बाद छात्र के 3 माह का वैध शुल्क ₹12,570 काटकर, शेष ₹29,330 का खातापेयी (Account Payee) चेक (HDFC Bank, चेक नं. 000235) संचालक आशु धनोंदिया द्वारा अभिभावक को दफ्तर बुलाकर श्रीमती पूजा अग्रवाल के नाम सौंपा गया।

एक अभिभावक लड़ा… और सिस्टम को होना पड़ा जवाबदेह
कटघोरा के अधिकांश अभिभावक बच्चों के भविष्य और निजी स्कूलों के दबाव के डर से चुप रह जाते हैं। लेकिन इस मामले में पीड़ित पिता ने दस्तावेजों और नियमों का सहारा लेकर अपनी लड़ाई लड़ी। इस घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि जब अभिभावक अपने हक के लिए खड़े होते हैं, तो प्रबंधन को अपनी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करना ही पड़ता है।
“अपने हक की एक चवन्नी भी जरूरी है” — अभिभावक का सन्देश
अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने के बाद पीड़ित अभिभावक ने क्षेत्र के सभी पालकों से अपने हक के लिए जागरूक रहने की अपील की:









