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फर्जीवाड़े की नींव पर ‘त्रिलोकी पब्लिक स्कूल’! शासकीय भूमि पर कब्जा और बिना मैदान मान्यता का खेल, फीस वापसी ने खोला वसूली का अड्डा!

शासकीय भूमि पर स्कूल, बिना मैदान मान्यता का खेल: कटघोरा के ‘त्रिलोकी पब्लिक स्कूल’ पर उठीं उंगलियां, फीस रिफंड से खुला मनमानी का चिट्ठी-पत्री!

कोरबा/कटघोरा | डिजिटल डेस्क:

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का कटघोरा इलाका इन दिनों शिक्षा के नाम पर चल रहे कथित व्यापार और प्रशासनिक सांठगांठ की सुर्खियों में है। त्रिलोकी पब्लिक स्कूल (CBSE Affiliation No. 3330491) की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों के आक्रोश का गुबार अब सड़कों और शिक्षा विभाग के दफ्तरों तक पहुँच चुका है। जिस संस्थान को नौनिहालों के भविष्य निर्माण का केंद्र होना चाहिए था, वह अब नियमों की धज्जियाँ उड़ाने, कॉपियों-किताबों की मोनोपॉली चलाने और संदिग्ध व्यवस्थाओं को लेकर सीधे कटघरे में आ खड़ा हुआ है।

शासकीय भूमि पर स्कूल का संचालन और गायब खेल का मैदान: मान्यता के फर्जीवाड़े पर गहराया शक!

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इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू सीबीएसई बोर्ड की मान्यता और स्कूल के ढांचागत दावों से जुड़ा है। नियमों की साफ शर्त है कि सीबीएसई स्कूल के पास सर्वसुविधायुक्त खेल का मैदान और नियमानुसार निजी/वैध भूमि होना अनिवार्य है। इसके ठीक उलट, अभिभावकों और स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि यह स्कूल बिना किसी स्पोर्ट्स ग्राउंड के संचालित हो रहा है और कथित तौर पर शासकीय (पेट) भूमि के हिस्से पर इसका ढांचा खड़ा कर दिया गया है।

आखिर किस आधार पर निरीक्षण करने वाली टीमों ने कागजी हरी झंडी थमा दी? क्या निरीक्षण के समय अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी थी या फिर फर्जी तस्वीरों व कागजातों के दम पर केंद्रीय बोर्ड की आंखों में धूल झोंकी गई? अगर सरकारी जमीन और बिना मैदान के स्कूल चल रहा है, तो यह सीधे-सीधे आपराधिक धोखाधड़ी का मामला बनता है।

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कॉपियों-किताबों का ‘सिंडिकेट’: पठन-पाठन दरकिनार, सिर्फ मुनाफाखोरी पर जोर!

अभिभावकों के वित्तीय शोषण का आलम यह है कि स्कूल प्रशासन पर एक तय दुकान से ही पाठ्यसामग्री, कॉपियां और कवर का बंडल खरीदने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बाजार की तय दरों से कई गुना अधिक कीमतों पर बेची जा रही इन कॉपियों और किताबों के सिंडिकेट में पारदर्शिता नाम की कोई चीज नजर नहीं आती। अभिभावकों को किसी अन्य दुकान से सामग्री खरीदने का विकल्प तक नहीं दिया जाता, जो सीधे तौर पर अनुचित व्यापारिक दबाव और अभिभावकों की जेब पर डाका डालने जैसा है।

डीईओ के हस्तक्षेप से लौटाए ₹29,330: रिफंड ने थमाया मनमानी का कबूलनामा

हाल ही में सामने आए एक मामले ने स्कूल प्रबंधन की पोल पूरी तरह खोलकर रख दी है। पीड़ित अभिभावक प्रवीन कुमार अग्रवाल ने जब अपने बच्चे का स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) माँगा और एडवांस जमा फीस की वापसी की मांग की, तो प्रबंधन ने अपने तेवर दिखाए। चक्कर कटवाने और साफ मना करने के बाद मामला जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के दफ्तर पहुँचा, तो दबाव में आकर स्कूल को करीब 29 हजार रुपये लौटाने पड़े।
बड़ा खुलासा: यह ₹29,330 का रिफंड किसी स्वैच्छिक फैसला नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई के डर से दिया गया “कबूलनामा” है। यदि फीस प्रक्रिया में कोई खोट नहीं था, तो अधिकारी के पास शिकायत पहुंचते ही इतनी बड़ी रकम वापस करने की नौबत क्यों आई?

कब जागेगा सुस्त प्रशासन? क्या मान्यता रद्द करने की हिम्मत दिखाएंगे जिम्मेदार?

अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न कोरबा जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और एंटी करप्शन तंत्र के सामने है। कब तक निजी स्कूल की इस मनमानी और सरकारी जमीन के कथित उपयोग पर लीपापोती चलती रहेगी? क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच दल का गठन कर स्कूल के मान्यता संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल कराएगा, या फिर किसी व्यापक जनांदोलन का इंतजार किया जा रहा है? आक्रोशित अभिभावकों ने अब साफ कर दिया है कि वे केवल कागजी खानापूर्ति से मानने वाले नहीं हैं; वे दोषी प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई और सीबीएसई मान्यता रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।

 

 

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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