DFO बोले- “शिकायत मिलने पर होगी जांच”; पसान रेंज में 16 साल पुराने रतनजोत के हरे-भरे पौधे काटने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश

कटघोरा/बिलासपुर। कटघोरा वनमंडल के पसान वनपरिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा की जा रही एक कार्रवाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा क्षेत्र में सालों पुराने, पर्यावरण के लिए अनुकूल और औषधीय गुणों से भरपूर रतनजोत के पौधों को बड़े पैमाने पर काटा और उखाड़ा जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने मुख्य वन संरक्षक (CCF), बिलासपुर सर्किल को एक पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी ओर, कटघोरा वनमंडलाधिकारी (DFO) ने बड़े पैमाने पर कटाई की बात से साफ इनकार करते हुए लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच की बात कही है।
100-100 हेक्टेयर का प्लांटेशन और विरोध की वजह

ग्रामीणों द्वारा वन विभाग के आला अधिकारियों को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार यह मामला करीब 16-17 वर्ष पुराना है। उस समय पसान परिक्षेत्र के सेमरा बीट में वन भूमि पर अतिक्रमण (नवतोड़) को रोकने के उद्देश्य से तुलसीडांड और ग्राम सैला के कटेलामुड़ा में 100-100 हेक्टेयर के विशाल रकबे पर रतनजोत के पौधों का वृहद रोपण किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि ये पौधे अब पूरी तरह स्थापित होकर पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रहे थे, लेकिन पसान रेंज के अधिकारियों द्वारा इन उपयोगी पौधों को उखाड़कर उनकी जगह दूसरा नया पौधा लगाया जा रहा है। जड़ें उखड़ने के कारण क्षेत्र में भूमि का क्षरण और मिट्टी का बहना भी शुरू हो गया है, जिससे पर्यावरण को दोहरा नुकसान पहुंच रहा है।
शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप

शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर वित्तीय सवाल भी खड़े किए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक साल 2022-23 में तुलसीडांड रोपण क्षेत्र में मिश्रित प्रजाति के नए पौधों का रोपण किया गया था, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में उस समय लगाए गए पौधों का कोई विकास नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे शासकीय राशि का सीधे तौर पर दुरुपयोग हुआ है। उनका सवाल है कि जब पिछला रोपण पूरी तरह असफल रहा, तो फिर से पुराने हरे-भरे पौधों को नष्ट कर नया रोपण करने का क्या औचित्य है।
मामले में कटघोरा DFO का वक्तव्य

इस पूरे विवाद और ग्रामीणों के आरोपों पर जब कटघोरा DFO से सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने विभागीय नियमों और वानिकी दृष्टिकोण का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की। DFO ने कहा कि विभाग द्वारा जो भी कार्य किए जाते हैं, वे वानिकी दृष्टिकोण के तहत वन संवर्धन और संरक्षण के लिए होते हैं। रतनजोत के जो पौधे प्राकृतिक रूप से टूट-फूट जाते हैं या खराब हो जाते हैं, केवल उनकी साफ-सफाई कर नया पौधा रोपण का कार्य किया जाता है। अभी DFO कार्यालय के पास ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी या पुष्टि नहीं आई है कि कहीं पर बड़े पैमाने पर रतनजोत की कटाई की जा रही है।
अनुमति और पुरस्कार पर DFO की स्पष्टीकरण
जब DFO से पूछा गया कि क्या इन पौधों को काटने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता होती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि रतनजोत पारंपरिक वानिकी पौधे की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए वन संवर्धन के उद्देश्य से टूटे-फूटे पौधों को साफ कर नया रोपण करने के लिए किसी विशेष अनुमति की जरूरत नहीं होती। वहीं दूसरी ओर, तत्कालीन कलेक्टर अशोक अग्रवाल द्वारा इस बेहतरीन प्लांटेशन के लिए संबंधित वनपाल को सम्मानित किए जाने के सवाल पर DFO ने पूरी तरह अनभिज्ञता जताई।
लिखित शिकायत के बाद आगे की कार्रवाई
DFO ने साफ तौर पर कहा कि यह मामला अभी तक आधिकारिक रूप से उनके संज्ञान में नहीं आया है और न ही विभाग के पास कोई लिखित शिकायत पहुंची है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि शिकायत किस विशेष क्षेत्र और कितने रकबे को लेकर की जा रही है। लिखित शिकायत सामने आने के बाद ही तथ्यों के धरातल पर जांच की जाएगी और उसके आधार पर आगे की नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उच्च स्तरीय जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
एक तरफ जहाँ वन विभाग बड़े पैमाने पर कटाई के दावों को महज अफवाह या सामान्य साफ-सफाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण बिलासपुर सीसीएफ कार्यालय में पत्र सौंपने के बाद अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की यह शिकायत कटघोरा DFO कार्यालय पहुंचने के बाद विभाग धरातल पर जांच के क्या कदम उठाता है।









