LIVE UPDATE

CG : कलेक्टर कार्यालय की ढाल बने रेशम विभाग के उपसंचालक ? शिकायतों के बावजूद जांच लटकी, कमिश्नर के स्मरण पत्र को भी किया नजरअंदाज

हितग्राहियों के भुगतान और योजनाओं में अनियमितता के आरोप

सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े रेशम विभाग के उपसंचालक को संरक्षण? जांच आदेश और स्मरण पत्र पर कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल

अंबिकापुर। सरगुजा संभाग में रेशम विभाग से जुड़े कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में जांच प्रक्रिया लंबित रहने पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, रेशम विभाग के उपसंचालक से संबंधित गंभीर शिकायतों पर कमिश्नर कार्यालय द्वारा जांच आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद जारी स्मरण पत्र को भी नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

6 माह बाद भी शुरू नहीं हुई जांच

जानकारी के अनुसार, कार्यालय आयुक्त सरगुजा संभाग, अंबिकापुर को 10 सितंबर 2025 को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा गया था। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान रेशम विभाग में रैली-कोसा खरीदी, गुणवत्ता परीक्षण, हितग्राहियों को भुगतान, अनुदान वितरण तथा विभिन्न विकास कार्यों में अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा रैली-कोसा खरीदी में निर्धारित गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर निम्न ग्रेड सामग्री को उच्च ग्रेड के रूप में खरीदा गया। इसके अलावा गुणवत्ता परीक्षण प्रमाण पत्र जारी करने में भी मिलीभगत और भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है।

ये खबर भी पढ़ें…
युवा कांग्रेस चुनाव में बड़ा उलटफेर: भूपेश बघेल गुट के सत्येंद्र चेलक और देवेंद्र यादव गुट के शैलेन्द्र बंजारे को इलेक्शन कमीशन ने ठहराया अयोग्य
युवा कांग्रेस चुनाव में बड़ा उलटफेर: भूपेश बघेल गुट के सत्येंद्र चेलक और देवेंद्र यादव गुट के शैलेन्द्र बंजारे को इलेक्शन कमीशन ने ठहराया अयोग्य
September 7, 2026
युवा कांग्रेस चुनाव में बड़ा उलटफेर: दोनों प्रदेश अध्यक्ष प्रत्याशियों पर गिरी गाज, सत्येंद्र चेलक और शैलेन्द्र बंजारे चुनावी दौड़...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

हितग्राहियों के भुगतान और योजनाओं में अनियमितता के आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं के तहत हितग्राहियों को दी जाने वाली अनुदान राशि, तसर ककून उत्पादन योजना, धागाकरण योजना और मनरेगा से जुड़े कार्यों में भी अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कई दस्तावेज सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए।

ये खबर भी पढ़ें…
हाईकोर्ट में पुलिस का बड़ा खुलासा: निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित
हाईकोर्ट में पुलिस का बड़ा खुलासा: निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित
October 1, 2026
बिलासपुर। निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े महिला संबंधी शिकायत मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

वहीं विभिन्न रेशम उद्यानों में घेराव, फेंसिंग, घास सफाई, खाद वितरण, चौकीदारी, मरम्मत और उपकरण सफाई जैसे कार्यों में लाखों रुपए के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन कार्यों में फर्जी श्रमिकों और फर्जी भुगतान की आशंका है।

गर्मी के मौसम में घास सफाई पर लाखों खर्च

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनवरी से जून तक के सूखे मौसम में घास सफाई और प्रक्षेत्र की साफ-सफाई जैसे कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया। साथ ही नैनो यूरिया स्प्रे, मकान मरम्मत और उपकरण जैसे कार्यों में भी भारी भुगतान किए जाने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय में भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। बताया गया कि 9 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत पहुंचने के बाद संभागायुक्त कार्यालय ने 4 मई 2026 को कलेक्टर सरगुजा को स्मरण पत्र जारी कर 15 दिवस के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा था। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब तक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अतिरिक्त प्रभार मिलने पर उठे सवाल

मामले में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि शिकायतों के बावजूद संबंधित उपसंचालक को बलरामपुर जिले का अतिरिक्त वित्तीय प्रभार सौंप दिया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि बलरामपुर में उनके कार्यकाल के दौरान हुए भुगतानों की भी जांच कराई जाए।

निष्पक्ष जांच की मांग- शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए राज्य स्तरीय स्वतंत्र टीम गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो शासन की जीरो टॉलरेंस नीति पर आमजन का विश्वास प्रभावित हो सकता है। फिलहाल मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *