छत्तीसगढ़- फेसबुक अकाउंट ब्लॉक करने पर हाईकोर्ट सख्त, करण गोयल को मिली राहत; मेटा को अकाउंट बहाल करने का आदेश
बिना पूर्व सूचना और कारण बताए अकाउंट बंद करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने और भविष्य में ऐसी सामग्री नहीं डालने की शर्त पर मिली अंतरिम राहत

बिलासपुर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मनमानी और यूजर्स के अधिकारों से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। बिना किसी पूर्व नोटिस और स्पष्ट कारण के फेसबुक अकाउंट ब्लॉक किए जाने पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता करण गोयल को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने मेटा, केंद्र और राज्य सरकार को फेसबुक अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह राहत बिना शर्त नहीं दी है। याचिकाकर्ता को अपने अकाउंट पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री हटानी होगी और भविष्य में इस तरह की पोस्ट नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने 29 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। मामला केवल एक फेसबुक अकाउंट बंद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा किसी यूजर का अकाउंट प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देने जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी इससे जुड़े हैं।

याचिकाकर्ता करण गोयल की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका फेसबुक अकाउंट बिना किसी पूर्व सूचना के ब्लॉक कर दिया गया था। अकाउंट बंद किए जाने का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया। उन्होंने अकाउंट दोबारा शुरू कराने के लिए संबंधित पक्षों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन न तो अकाउंट बहाल किया गया और न ही आवेदन पर कोई जवाब दिया गया। आखिरकार उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के 17 अगस्त 2026 के सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए अंतरिम राहत की मांग की। वहीं, प्रतिवादियों ने याचिका में मांगी गई राहत का विरोध किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए फेसबुक अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि याचिकाकर्ता को अपने अकाउंट पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री हटानी होगी और भविष्य में ऐसी सामग्री प्रकाशित नहीं करनी होगी। साथ ही आदेश की जानकारी मेटा, केंद्र और राज्य सरकार को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी याचिकाकर्ता को दी गई है।
मेटा सहित सभी प्रतिवादियों से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने मामले में सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। प्रकरण की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सुनील ओटवानी एवं अधिवक्ता अंश गोयल ने पैरवी की। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अनुकृति दारो तथा राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनिल पांडे उपस्थित हुए।
अब इस मामले में अगली सुनवाई पर प्रतिवादियों के जवाब और उनके पक्ष के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।









