शर्मनाक! अटल जी की प्रतिमा पर भी कथित खेल? ब्रॉन्ज की जगह सीमेंट पर पेंट का आरोप, कटघोरा के ‘अटल परिसर’ में खुली परतें

कोरबा। छत्तीसगढ़ के निर्माता, पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में करोड़ों रुपये की लागत से विकसित किए गए ‘अटल परिसर’ अब गंभीर सवालों के घेरे में हैं। कोरबा जिले की कटघोरा नगर पालिका परिषद में निर्मित अटल परिसर को लेकर ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। आरोप है कि जिस प्रतिमा को ब्रॉन्ज (कांस्य) धातु से बनाया जाना था, उसकी जगह सीमेंट और पत्थर की प्रतिमा तैयार कर उस पर केवल ब्रॉन्ज रंग का पेंट चढ़ा दिया गया। हाल की बारिश के बाद रंग की परत उखड़ने से पूरा मामला चर्चा का विषय बन गया है और अब इसकी निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
अटल जी की स्मृति में बनी थी महत्वाकांक्षी योजना

प्रदेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में राज्य के सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ विकसित करने की योजना बनाई थी। इस योजना का उद्देश्य केवल प्रतिमा स्थापित करना नहीं था, बल्कि सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण कर उन्हें अटल जी की स्मृतियों से जोड़ना भी था। इसी योजना के तहत नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अटल जी की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित की गईं तथा परिसरों का निर्माण कराया गया। करोड़ों रुपये की इस योजना को प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना गया था।
कटघोरा में निर्माण कार्य पर उठे गंभीर सवाल

कटघोरा नगर पालिका परिषद में निर्मित अटल परिसर अब विवादों के केंद्र में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में शुरुआत से ही गुणवत्ता की अनदेखी की गई। जानकारी के अनुसार इस कार्य का ठेका नगर के व्यवसायी एवं ठेकेदार मनोज अग्रवाल को दिया गया था। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य आगे पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से कराया गया। कई महीनों तक चले निर्माण कार्य के बाद जब परिसर तैयार हुआ तो प्रतिमा को लेकर संदेह की स्थिति बनी रही, लेकिन हाल की बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
ब्रॉन्ज प्रतिमा की जगह सीमेंट की प्रतिमा लगाने का आरोप

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि परियोजना के अनुसार परिसर में ब्रॉन्ज धातु की प्रतिमा स्थापित की जानी थी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹14 लाख बताई जा रही है। लेकिन वास्तविकता में सीमेंट और पत्थर से प्रतिमा तैयार कर उस पर ब्रॉन्ज रंग का पेंट कर दिया गया। लोगों का कहना है कि यदि प्रतिमा वास्तव में ब्रॉन्ज की होती तो बारिश के बाद उसकी सतह से रंग इस तरह नहीं उतरता और भीतर से सीमेंट जैसी परत दिखाई नहीं देती।
इसी आरोप ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि निर्धारित सामग्री का उपयोग नहीं हुआ तो सरकारी राशि के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
बारिश ने खोली कथित पोल, उखड़ने लगी रंग की परत
हाल ही में हुई बारिश के बाद प्रतिमा पर चढ़ाया गया ब्रॉन्ज रंग कई स्थानों से उखड़ने लगा। इसके बाद प्रतिमा की वास्तविक सामग्री को लेकर लोगों के बीच चर्चाएं तेज हो गईं। मौके पर पहुंचने वाले नागरिकों का कहना है कि जहां रंग उखड़ा, वहां धातु जैसी सतह दिखाई देने के बजाय सीमेंट जैसी परत नजर आई। यही तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं और इन्हीं के आधार पर पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिमा वास्तव में कांस्य धातु की होती तो रंग उखड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इसी कारण अब प्रतिमा की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की जा रही है।
पेटी कॉन्ट्रैक्ट और राजनीतिक चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
मामले में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से कराया गया। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि निर्माण कार्य से जुड़े कुछ लोगों का राजनीतिक संबंध होने के कारण पूरे मामले में जवाबदेही तय नहीं हो सकी। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हें लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सरकारी योजना में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
46 करोड़ रुपये से अधिक की योजना पर उठे सवाल
राज्य सरकार द्वारा इस योजना के लिए लगभग ₹46 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई थी। प्रदेश के कुल 187 नगरीय निकायों में इस योजना को लागू किया गया, जिनमें 14 नगर निगम, 50 नगर पालिका परिषद और 123 नगर पंचायतें शामिल हैं। योजना के तहत नगर निगमों को ₹50 लाख, नगर पालिकाओं को ₹30 लाख तथा नगर पंचायतों को ₹20 लाख की राशि प्रदान की गई थी।
अब कटघोरा में सामने आए आरोपों के बाद यह मांग उठने लगी है कि केवल एक नगर पालिका ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में स्थापित अटल परिसरों और वहां लगी प्रतिमाओं की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।
निष्पक्ष जांच की मांग हुई तेज
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों का कहना है कि यदि प्रतिमा निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया या सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की समिति बनाकर प्रतिमा की वास्तविक सामग्री, निर्माण गुणवत्ता और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराई जाए तथा यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
संबंधित पक्ष का पक्ष आना बाकी
फिलहाल इस मामले में लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित ठेकेदार, नगर पालिका परिषद अथवा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने मामले का संतुलित और तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत किया जा सके।









