जंगल के सीने पर बस रही बस्ती! वन परिक्षेत्र कटघोरा के ग्राम बसंतपुर एवं झालकछार में वन भूमि पर निर्माण से मचा हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा/कटघोरा। वन मंडल कटघोरा के अंतर्गत वन परिक्षेत्र कटघोरा के ग्राम बसंतपुर एवं झालकछार से सामने आई तस्वीरों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। GPS लोकेशन के साथ सामने आई तस्वीरों में जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के बीच मिट्टी एवं पक्के मकानों का निर्माण स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यदि जांच में यह भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र की पाई जाती है, तो यह वन भूमि पर अतिक्रमण का गंभीर मामला हो सकता है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन परिक्षेत्र कटघोरा के ग्राम बसंतपुर एवं झालकछार में इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य आखिर किसकी निगरानी में होता रहा? क्या बीट गार्ड, रेंजर और विभागीय अमला इससे पूरी तरह अनजान था, या शिकायतों के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई?



स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग नियमित गश्त और निगरानी का दावा करता है, तो जंगल के बीच स्थायी मकानों का निर्माण होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर निर्माण सामग्री पहुंची कैसे? निर्माण कार्य दिनों तक चलता रहा, फिर भी विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी?
अब लोगों की निगाहें वन मंडल कटघोरा पर टिकी हैं। मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित भूमि का सीमांकन कराया जाए और यदि जांच में वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो अतिक्रमणकारियों के साथ-साथ विभागीय स्तर पर हुई किसी भी लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
वन संरक्षण के दावों और जमीन की हकीकत के बीच यह मामला बड़ा सवाल बनकर खड़ा है—क्या जंगल सुरक्षित हैं या फिर अतिक्रमणकारियों के सामने वन विभाग बेबस नजर आ रहा है?









