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EXCLUSIVE: NGT की रोक के बाद भी जमकर खनन और परिवहन, कटघोरा की अहिरन नदी में अब ‘रात ही नहीं, दिनदहाड़े’ चल रहा रेत का खेल; खनिज नाके पर ‘मासिक बंधी’ के आरोप!

कोरबा/कटघोरा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों और प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कटघोरा क्षेत्र की अहिरन नदी में अवैध रेत उत्खनन का काला कारोबार अब सिर्फ रात के अंधेरे तक सीमित नहीं रह गया है। मानसून सत्र के मद्देनजर नियमों के मुताबिक 10 जून से ही नदियों से रेत निकालने पर पूरी तरह रोक लागू है, लेकिन धरातल पर तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब दिन-रात चौबीसों घंटे दिनदहाड़े जमकर अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, इस खुली लूट के पीछे खनिज विभाग की कथित मिलीभगत और खनिज नाके पर ‘महीने की बंधी’ यानी मासिक फिक्स रकम का बड़ा खेल सामने आ रहा है, जिसके कारण यह अवैध कारोबार क्षेत्र में चरम पर है।

अब ‘रात की पाबंदी’ खत्म, दिन-रात जारी है रेत की खुली लूट

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ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले जहां कार्रवाई के डर से तस्कर सिर्फ रात के वक्त सक्रिय होते थे, वहीं अब प्रशासन का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। अहिरन नदी के जुराली, आमाखोखरा और औराभाटा घाट क्षेत्र में अब चिलचिलाती धूप में भी दर्जनों ट्रैक्टर और भारी गाड़ियां बिना किसी डर के रेत लोड करती देखी जा सकती हैं। शाम को होने वाली रेकी अब महज एक औपचारिकता रह गई है, क्योंकि अब सुबह हो या रात, नदी का सीना चीरकर रेत गायब करने का यह सिलसिला बिना रुके लगातार 24 घंटे जारी रहता है। स्थानीय लोग इस स्थिति को देखकर हताश हैं और उनका कहना है कि अब यह नदी नहीं, बल्कि रसूखदारों के लिए लूट का खुला मैदान बन चुकी है।

खनिज नाके पर ‘मासिक बंधी’ और सांठगांठ का बड़ा खेल

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इस पूरे अवैध साम्राज्य के बेखौफ संचालन के पीछे सबसे गंभीर आरोप खनिज विभाग और उसके सुरक्षा तंत्र पर लग रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि खनिज नाके और संबंधित विभाग के कुछ कारिंदों के साथ रेत माफियाओं की कथित रूप से ‘मासिक बंधी’ तय हो चुकी है, जिसके तहत हर महीने एक मोटी रकम ऊपर तक पहुंचाई जा रही है। इसी ‘टोकन व्यवस्था’ या एंट्री फीस के चलते अवैध रेत से लदे इन वाहनों को मुख्य सड़कों और नाकों से बिना किसी चेकिंग या रॉयल्टी पर्ची के आसानी से गुजरने का सुरक्षित रास्ता मिल जाता है। यह स्थिति साफ करती है कि बिना किसी मजबूत अंदरूनी तालमेल और संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर कानून को ठेंगा दिखाना मुमकिन नहीं है।

‘स्टाफ की कमी’ का बहाना या जानबूझकर आंखें मूंदना?

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इस खुली सांठगांठ को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और सीधे तौर पर खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग द्वारा अक्सर यह पारंपरिक तर्क दिया जाता है कि बल यानी स्टाफ की कमी के कारण उनकी कार्रवाई सीमित रहती है, लेकिन जागरूक नागरिक अब इस दलील को सिरे से खारिज कर रहे हैं। लोगों का सीधा सवाल है कि यदि विभाग में स्टाफ की कमी है, तो नाके पर तैनात कर्मचारी दिनदहाड़े सामने से गुजरने वाले अवैध ट्रैक्टरों को क्यों नहीं रोकते। ग्रामीणों का आरोप है कि फ्लाइंग स्क्वाड और माइनिंग विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजी आंकड़ों और छोटे-मोटे वाहन मालिकों तक ही सीमित है, जिससे यह शक गहराता है कि सिस्टम वाकई बेबस है या फिर तस्करों के आगे जानबूझकर घुटने टेक चुका है।

अहिरन नदी का वजूद खतरे में, मंडराया पेयजल संकट

पर्यावरणविदों के मुताबिक, मानसून के दौरान रेत निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध इसलिए होता है ताकि जलीय जीवों और नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाया जा सके। लेकिन विभाग की सरपरस्ती में चल रहे इस अंधाधुंध उत्खनन का सबसे गंभीर खामियाजा सीधे तौर पर प्रकृति और स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से अहिरन नदी का तल लगातार खोखला हो रहा है और इसका प्राकृतिक प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले समय में भीषण पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही नदी के तटों का तेजी से हो रहा कटाव भविष्य में किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान का इशारा कर रहा है।

साख की परीक्षा में स्थानीय प्रशासन

जब प्रतिबंध के बीच दिन-रात अवैध परिवहन जारी है, नाके पार करने का रूट साफ है और मिलीभगत की चर्चाएं आम हैं, तो उच्च अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठना लाजिमी है। कटघोरा की अहिरन नदी में चल रहा यह खेल अब सिर्फ अवैध रेत खनन का एक सामान्य मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एनजीटी के आदेशों की अवमानना और स्थानीय प्रशासन की साख, उसकी कार्यप्रणाली और जनता के प्रति जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कब और क्या ठोस कार्रवाई करता है।

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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