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KATGHORA/MARWAHI: खुद आरोपों से घिरे DFO कुमार निशांत पर फिर सवाल: बुका जल विहार से मरवाही गोबर खरीदी जांच तक आखिर किसे बचाने का खेल?

, समिति गठन, राजस्व और जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल;

कटघोरा/मरवाही। कटघोरा वनमंडल के एतमानगर वन परिक्षेत्र स्थित बुका जल विहार अब केवल पर्यटन स्थल का मामला नहीं रह गया है। मोटर बोट संचालन, वित्तीय पारदर्शिता, समिति गठन और जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस बीच कटघोरा DFO कुमार निशांत की भूमिका को लेकर भी गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि जिस अधिकारी की कार्यप्रणाली पर पहले से सवाल उठते रहे हों, उसी अधिकारी को संवेदनशील मामलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपना कई नए सवाल खड़े करता है।

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बिना आदेश चलता रहा मोटर बोट संचालन?

सूत्रों के अनुसार बुका जल विहार में वर्षों तक मोटर बोट का संचालन खुलेआम कराया जाता रहा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके लिए जरूरी शासकीय अनुमति, संचालन आदेश, सुरक्षा स्वीकृतियां और वैधानिक दस्तावेजों का कहीं कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। आरोप है कि पूरा खेल फर्जीवाड़े और नियमों को ताक पर रखकर चलाया गया।? आखिर किसके संरक्षण में बिना अनुमति मोटर बोट संचालन चलता रहा और जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे?दस्तावेजों की गैरमौजूदगी ने पूरे मामले को गंभीर घोटाले और प्रशासनिक मिलीभगत के शक के घेरे में ला खड़ा किया है।

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नेताओं और अधिकारियों की आवभगत का जरिया बना जल विहार?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बुका जल विहार का उपयोग केवल पर्यटन गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। दावा किया जा रहा है कि वर्षों तक नेताओं और अधिकारियों की मेहमाननवाजी तथा विशेष कार्यक्रमों के लिए भी मोटर बोट संचालन कराया जाता रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संचालन के लिए कोई स्पष्ट शासकीय आदेश नहीं था तो आखिर किसके संरक्षण में यह व्यवस्था चलती रही और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

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बीमा, सुरक्षा और वैधानिक दस्तावेजों पर सन्नाटा क्यों?

मोटर बोट संचालन को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल भी लगातार उठ रहे हैं। आरोप है कि नावों के बीमा, यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं को लेकर कभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। अब लोग जानना चाहते हैं कि क्या संचालन के दौरान सभी वैधानिक नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

जल विहार समिति में लोकतांत्रिक प्रक्रिया दरकिनार?

बुका जल विहार समिति के गठन और संचालन को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि समिति के अध्यक्ष का विधिवत चुनाव नहीं कराया गया और वर्षों तक एक ही व्यक्ति को पद पर बनाए रखा गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समिति का गठन ही सवालों के घेरे में है तो उसके द्वारा लिए गए वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों की वैधता भी जांच का विषय बनती है।

लाखों का राजस्व आया, लेकिन हिसाब कहां?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जल विहार से वर्षों से राजस्व प्राप्त होता रहा, लेकिन उसकी आय-व्यय का विस्तृत विवरण कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जल विहार से प्राप्त राशि कितनी थी, उसका उपयोग किन मदों में हुआ और उसकी निगरानी किस स्तर पर की गई। वित्तीय पारदर्शिता की कमी ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।

“डिप्टी रेंजर, रेंजर, एसडीओ एवं डीएफओ सभी अधिकारियों ने मिलकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और घोटाला किया है। संबंधित स्थान को आम जनता के हितों के विरुद्ध निजी विलासता और गलत गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया है। सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।”

मरवाही गोबर खरीदी जांच से फिर घिरे कुमार निशांत

बुका जल विहार विवाद के बीच अब मरवाही के बहुचर्चित गोबर खरीदी प्रकरण की जांच को लेकर भी कुमार निशांत की भूमिका चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस जांच समिति की अध्यक्षता उन्होंने की, उसमें तत्कालीन DFO रौनक गोयल की भूमिका को पर्याप्त गंभीरता से नहीं देखा गया। उनका तर्क है कि किसी भी वित्तीय प्रक्रिया में अंतिम अनुमोदन सक्षम अधिकारी द्वारा दिया जाता है, ऐसे में जिम्मेदारी तय करते समय उच्च अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा क्यों नहीं की गई।

खुद विवादों में घिरे अधिकारी को संवेदनशील जांचों की जिम्मेदारी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिनके कार्यकाल और निर्णयों को लेकर लगातार शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हों, उन्हें ही एक के बाद एक संवेदनशील मामलों की जांच की जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।

जवाब का इंतजार, सवाल बरकरार

बुका जल विहार घोटाला और मरवाही गोबर खरीदी जांच प्रकरण अब आम चर्चा का विषय बन चुके हैं। जब तक मोटर बोट संचालन से जुड़े दस्तावेज, समिति गठन के रिकॉर्ड, वित्तीय विवरण और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जातीं, तब तक सवाल उठते रहेंगे। अब निगाहें शासन और विभाग पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों का जवाब देते हैं या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

(नोट: खबर में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों और विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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