गौरेला पेंड्रा मरवाही -OTP घोटाले का खुलासा: ऑपरेटर ने किया खेल, कार्रवाई में अधिकारी क्यों फेल?किसके इशारे पर बच रहे घोटाले के असली चेहरे?
7 बिंदुओं में कलेक्टर को ज्ञापन, CEO-ऑपरेटर-वेंडर पर गंभीर आरोप—8 पंचायतों के खाते सील, विकास कार्य ठप

Gaurela pendra marwahi
गौरेला जनपद में 15वें वित्त मद से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में सरपंच संघ और सचिव संघ खुलकर सामने आ गए हैं। दोनों संगठनों ने कलेक्टर को 7 बिंदुओं में विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

संघ का स्पष्ट कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर के सरपंच और सचिवों को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है, जबकि भुगतान प्रक्रिया और तकनीकी नियंत्रण पूरी तरह जनपद स्तर पर था। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 15वें वित्त मद की राशि का संचालन और भुगतान जनपद में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक जायसवाल के माध्यम से किया गया, जिसे इसके लिए अधिकृत किया गया था।
बिना सप्लाई भुगतान का आरोप

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई मामलों में बिना किसी वास्तविक सप्लाई के ही वेंडरों को लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके बावजूद अब तक इस मामले में न तो FIR दर्ज हुई है और न ही किसी बड़े स्तर पर ठोस कार्रवाई सामने आई है। इससे जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तकनीकी प्रक्रिया में कथित हेरफेर

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का प्रशिक्षण सचिवों को कभी दिया ही नहीं गया, जबकि इसके लिए कई बार मांग की गई थी। इसके उलट, पोर्टल में सरपंच और सचिवों के मोबाइल नंबर की जगह ऑपरेटर का मोबाइल नंबर दर्ज कर दिया गया, जिससे सभी भुगतान का OTP सीधे ऑपरेटर को प्राप्त होता रहा।
संघ के अनुसार, इसी का फायदा उठाकर ऑपरेटर ने OTP के जरिए भुगतान प्रक्रिया को अंजाम दिया, जबकि संबंधित सरपंच और सचिवों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
DSC अप्रूवल पर भी उठे सवाल
मामले में डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि DSC का अप्रूवल जनपद CEO और करारोपण शाखा द्वारा किया जाता रहा, लेकिन इसके बावजूद अन्य पंचायतों के DSC से भुगतान किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
8 पंचायतों के खाते बंद, विकास कार्य प्रभावित
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा 8 ग्राम पंचायतों के वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ा है और कई योजनाएं अधर में लटक गई हैं। सरपंच-सचिवों का कहना है कि जब वे दोषी ही नहीं हैं, तो उनके पंचायतों को दंडित करना गलत है।
एक साल बाद भी कार्रवाई शून्य
गौरतलब है कि इस पूरे मामले को लगभग एक वर्ष होने को है, लेकिन जिला पंचायत स्तर पर अब तक कोई निर्णायक और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। संघ ने जिला पंचायत अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि वास्तविक जिम्मेदार—तत्कालीन CEO, संबंधित ऑपरेटर और वेंडर—पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
सरपंच संघ और सचिव संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पंचायतों के खाते बहाल नहीं किए गए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।










