KORBA BREAK: ‘जनप्रतिनिधियों का अपमान बर्दाश्त नहीं’ — CEO के खिलाफ जिपं में धरना, तालाबंदी का अल्टीमेटम”
CEO बनाम जनप्रतिनिधि! कोरबा जिपं में गरमाई सियासत, तालाबंदी की उल्टी गिनती शुरू”

KORBA BREAK: जिपं में उबाल, CEO के एटीट्यूड पर भड़के जनप्रतिनिधि, तालाबंदी की चेतावनी
अध्यक्ष सहित सदस्यों का धरना, तीन घंटे इंतजार के बाद भी बैठक में नहीं पहुंचे CEO, 10 जून को ताला लगाने की चेतावनी

कोरबा। जिला पंचायत कोरबा में सोमवार को उस वक्त जमकर हंगामा देखने को मिला, जब जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह सहित कई जिला पंचायत सदस्य जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए। जिला पंचायत परिसर में धरना, नारेबाजी और तालाबंदी की चेतावनी ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि प्रदर्शन में कई महिला सदस्यों के पति भी सक्रिय रूप से मौजूद रहे, जिसकी राजनीतिक गलियारों में जमकर चर्चा होती रही।
जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी, डीएमएफ फंड में अपारदर्शिता और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। अध्यक्ष पवन सिंह ने दो टूक कहा कि “ऐसे अधिकारी सरकार को बदनाम कर रहे हैं। 20-25 साल के सार्वजनिक जीवन में 16 सीईओ देख चुका हूं, लेकिन इनके जैसा एटीट्यूड किसी में नहीं देखा।”

तीन घंटे तक इंतजार… फिर फूटा गुस्सा
जानकारी के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष के चेंबर में जनपद सदस्यों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में विकास कार्यों, निर्माण योजनाओं और डीएमएफ फंड के उपयोग पर चर्चा होनी थी। इसके लिए जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग को भी बुलाया गया था, लेकिन आरोप है कि करीब तीन घंटे तक इंतजार कराने के बाद भी वे बैठक में नहीं पहुंचे।

इसी बीच जब सीईओ अपने चेंबर से बाहर निकलकर जाने लगे, तब सदस्यों ने उन्हें रोककर चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन “अभी टाइम नहीं है” कहकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद जनप्रतिनिधियों का गुस्सा भड़क उठा और जिला पंचायत परिसर में ही धरना शुरू हो गया। देखते ही देखते नारेबाजी तेज हो गई और माहौल गरमा गया।
“जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं”
अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि जिला पंचायत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। सामान्य सभा को दरकिनार कर प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमएफ की राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, लेकिन योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही।
उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो 10 जून को जिला पंचायत कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। “हम सदन को एक महीने का समय दे रहे हैं। यदि इसके बाद भी कार्यप्रणाली नहीं सुधरी तो जिला पंचायत में ताला लगा दिया जाएगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
“कमीशनखोरी का खेल चल रहा”
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सदस्यों का कहना था कि पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिक बनाकर रख दी गई है, जबकि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना है। जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो सभी सदस्य इस्तीफा देने तक को मजबूर होंगे। जिला पंचायत परिसर में देर शाम तक गहमागहमी का माहौल बना रहा और प्रशासनिक हलकों में इस विरोध प्रदर्शन की चर्चा होती रही।









