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GAURELA: फिर ज़िंदा हुआ 15वें वित्त घोटाले का जिन्न, दोषियों को बचाने के आरोप; भाजयुमो जिला महामंत्री ने सामग्री सप्लायरों पर FIR की उठाई मांग

यह मामला जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जनपद पंचायत गौरेला में 15वें वित्त आयोग योजना के तहत हुए कथित करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब 10 महीने पहले शिकायत और जांच शुरू होने के बावजूद अब तक मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री महेश राठौर ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि पूरे मामले में दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 15वें वित्त योजना के तहत पंचायतों में फर्जी तरीके से राशि आहरित और भुगतान किया गया। शिकायतों और प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और सामग्री सप्लायरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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महेश राठौर ने आरोप लगाया कि पंचायतों के खातों से राशि ट्रांसफर कर सामग्री सप्लायरों के खातों में भेजी गई और मिलीभगत के जरिए करोड़ों रुपये का गबन किया गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका भी संदिग्ध है, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की जाती रही। भाजयुमो नेता का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की जाती, तो पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होते। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से जांच को लंबित रखकर दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया, जिससे जनता और पंचायत प्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

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* घोटाले में शामिल सामग्री सप्लायरों एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल FIR दर्ज की जाए।

* गबन की गई राशि की तत्काल वसूली की जाए।

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* फर्जी भुगतान और ट्रांजेक्शन की निष्पक्ष जांच कर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

* लंबित विकास कार्यों का भुगतान जल्द जारी किया जाए।

महेश राठौर ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की राशि गांवों के विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए होती है, लेकिन यदि उसी राशि में भ्रष्टाचार हो तो यह सीधे जनता के अधिकारों पर चोट है। अब यह मामला जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर 10 महीने से लंबित इस कथित घोटाले में प्रशासन कब कार्रवाई करता है और क्या दोषियों तक कानून का हाथ पहुंच पाता है।

A Pranav

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