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KORBA:जमीन हमारी, रास्ता हमारा… बंद नहीं होने देंगे!” टीएमसी कंपनी, एसईसीएल सिंघाली और प्रशासन पर ग्रामीणों का बड़ा आरोप, अधिग्रहण के दस्तावेज़ मांगते ही बैकफुट पर अधिकारी

वैध नक्शा, ट्रांसफर दस्तावेज़ और अधिग्रहण रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

कटघोरा क्षेत्र के लालपुर, भेजी और नारा गांव में उस समय जबरदस्त तनाव की स्थिति बन गई, जब ग्रामीणों ने टीएमसी कंपनी और एसईसीएल सिंघाली प्रबंधन पर प्रशासन के साथ मिलकर वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते को जबरन बंद करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। गांव में भारी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि बिना वैध दस्तावेज़ और ग्रामवासियों की सहमति के किसी भी कीमत पर आम रास्ता बंद नहीं होने दिया जाएगा।

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ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी और प्रशासनिक अमला गांव की जनता को गुमराह कर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। मौके पर पहुंचे कटघोरा तहसीलदार, भू-राजस्व विभाग के अधिकारी और एसईसीएल प्रबंधन के प्रतिनिधियों से जब ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित मूल दस्तावेज़, नक्शा, अधिसूचना और रिकॉर्ड मांगा, तो कोई भी अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। ग्रामीणों के तीखे सवालों के बीच अधिकारी उल्टे पांव वापस लौट गए।

गांव में मौजूद लोगों का कहना था कि यदि जमीन वास्तव में अधिग्रहित हुई है, तो प्रशासन बताए कि अधिग्रहण कब हुआ, कितनी जमीन ली गई, किन किसानों की जमीन ली गई और उसके एवज में कितने प्रभावित परिवारों को नौकरी दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से परियोजना के नाम पर किसानों की जमीन तो ली गई, लेकिन कई परिवार आज भी रोजगार और मुआवजे के लिए भटक रहे हैं।

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“1990-93 के अधिग्रहण का हिसाब दो”

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ग्रामीणों ने विशेष रूप से वर्ष 1990-93 के दौरान तत्कालीन एसीसीएल/एसईसीएल द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन ली गई थी, लेकिन आज तक गांव के लोगों को यह जानकारी नहीं दी गई कि कितने किसानों को स्थायी नौकरी मिली और कितने परिवारों को लाभ से वंचित रखा गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित किसानों की पूरी सूची, अधिग्रहित भूमि का ब्यौरा, मुआवजा रिकॉर्ड और नौकरी पाने वाले लोगों की सूची सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि कई मामलों में वास्तविक प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार नहीं मिला।

“एसईसीएल ने टीएमसी को जमीन बेच दी?”

गांव में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित जमीन टीएमसी कंपनी को सौंप दी गई या बेच दी गई है। इसे लेकर ग्रामीणों ने टीएमसी कंपनी से भी सवाल पूछा है कि यदि कंपनी के पास जमीन का अधिकार है तो उसका वैध नक्शा, ट्रांसफर दस्तावेज़ और अधिग्रहण रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दस्तावेज़ दिखाने के बजाय प्रशासन और कंपनी केवल रास्ता बंद करने की कार्रवाई में जुटे हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

“रास्ता बंद हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन”

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि गांव का सार्वजनिक रास्ता बंद करने की कोशिश की गई तो बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता वर्षों से गांव के लोगों के आवागमन का मुख्य मार्ग रहा है और इसे बंद करना सीधे तौर पर ग्रामीणों के अधिकारों का हनन है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और कंपनी ग्रामीणों के सामने अधिग्रहण और जमीन हस्तांतरण के दस्तावेज़ पेश कर पाएंगे, या फिर पूरा मामला और बड़ा विवाद बनकर उभरेगा। गांव में फिलहाल माहौल गरमाया हुआ है और ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

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