लल्लनगुरु की खबर का असर: 12 घंटे में जागा राजस्व विभाग, विवादित जमीन पर राखड़ पटिंग पर लगी रोक
कोर्ट में मामला लंबित, फिर किसके इशारे पर चल रहा था काम?

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने वाली पत्रकारिता का असर एक बार फिर देखने को मिला है। लल्लनगुरु न्यूज में विवादित भूमि पर हो रहे कथित अवैध राखड़ पटिंग मामले का खुलासा होते ही राजस्व विभाग हरकत में आ गया। खबर प्रकाशित होने के महज 12 घंटे के भीतर प्रशासन ने स्थगन आदेश जारी कर विवादित जमीन पर चल रहे कार्य पर तत्काल रोक लगा दी।
मामला विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत तानाखार का है, जहां नेशनल हाईवे-130 किनारे स्थित खसरा नंबर 228/5, रकबा लगभग 5 एकड़ भूमि का मालिकाना विवाद कटघोरा व्यवहार न्यायालय में लंबित है। यह प्रकरण “रूप सिंह बनाम फगनी बाई व अन्य” केस क्रमांक 93A/2023 के तहत विचाराधीन है। इसके बावजूद कथित भूमाफियाओं द्वारा बेखौफ होकर जमीन पर राखड़ पटिंग का कार्य कराया जा रहा था।

पंचायत से तथ्य छिपाकर ली गई थी एनओसी
जानकारी के मुताबिक संबंधित पक्ष ने ग्राम पंचायत से न्यायालयीन विवाद की जानकारी छिपाकर एनओसी प्राप्त कर ली थी। बाद में जब पंचायत को पूरे मामले की सच्चाई पता चली, तो पंचायत ने तत्काल प्रभाव से एनओसी निरस्त कर दी। इसके बावजूद जमीन पर काम जारी रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा था।

कोर्ट में मामला लंबित, फिर किसके इशारे पर चल रहा था काम?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न कानून का डर है और न ही न्यायालय की प्रक्रिया की परवाह। लोगों का कहना है कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद जिस तरह खुलेआम राखड़ पटिंग की जा रही थी, उससे साफ जाहिर होता है कि कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण उन्हें प्राप्त था।

खबर प्रकाशित होते ही मचा हड़कंप
लल्लनगुरु न्यूज में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होते ही पोड़ी उपरोड़ा के राजस्व अमले में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तहसीलदार विनय देवांगन ने विवादित भूमि पर चल रहे राखड़ पटिंग कार्य को आगामी आदेश तक बंद करने का स्थगन आदेश जारी कर दिया। जारी आदेश में राजू श्रीवास पिता प्रकाश नारायण श्रीवास एवं इतवार कुमार पिता स्व. घासीदास महतो को 18 मई 2026 तक तहसीलदार न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित तिथि तक जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
स्थगन आदेश के बाद फिलहाल विवादित भूमि पर चल रहा कार्य रुक गया है, लेकिन पूरे क्षेत्र की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भूमाफियाओं के हौसले और बढ़ सकते हैं।









