कोरबा: अक्षय गर्ग हत्याकांड के मुख्य गवाह को जान से मारने की धमकी, बयान बदलने का दबाव; पुलिस ने दर्ज की ‘शून्य FIR’

कोरबा / कटघोरा | विशेष संवाददाता : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कटघोरा जनपद पंचायत के सदस्य और ठेकेदार अक्षय गर्ग हत्याकांड में एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य गवाह को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा घर पहुंचकर जान से मारने की धमकी देने और अदालत में आरोपियों के पक्ष में बयान बदलने का दबाव बनाने का संगीन मामला प्रकाश में आया है। घटना के बाद गवाह और उसके परिवार में भारी दहशत का माहौल है।
घर पहुंचकर दी गई गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पसान थाना क्षेत्र के ग्राम लोकाड़ा निवासी मुख्य गवाह कमलेश टीकम ने कटघोरा पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि एक अज्ञात व्यक्ति उनके निवास स्थान पहुंचा और उन्हें तथा उनके परिजनों को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी। आरोपी ने गवाह पर न्यायालय में चल रहे ट्रायल के दौरान अपना बयान बदलने और आरोपियों को बचाने के पक्ष में गवाही देने के लिए भारी दबाव बनाया।
कानूनी कार्रवाई: BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कटघोरा पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया है। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 332(1) (किसी व्यक्ति को लोक कर्तव्य के पालन से रोकने या डराने हेतु हमला/धमकी) तथा धारा 351 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला पंजीकृत किया है।
जीरो FIR और विवेचना का हस्तांतरण:

चूंकि घटना स्थल पसान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए कटघोरा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनन ‘शून्य (0) पर प्राथमिकी’ दर्ज की है। अग्रिम वैधानिक कार्रवाई और गहन विवेचना के लिए केस डायरी पसान थाना पुलिस को हस्तांतरित कर दी गई है।
पुलिस की जांच और विशेष टीमों का गठन
घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस की विशेष टीमें धमकी देने वाले अज्ञात व्यक्ति का सुराग लगाने और उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
उल्लेखनीय है कि चर्चित अक्षय गर्ग हत्याकांड में मुख्य आरोपी मुश्ताक अहमद समेत तीन अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। इसके बावजूद जेल से बाहर मुख्य गवाह को इस तरह खुल्लम-खुल्ला धमकी मिलने से स्थानीय पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपियों के इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस प्रशासन क्या कड़े कदम उठाता है।









