कोटमी कला में जमीन घोटाले का सनसनीखेज आरोप: कागजों की कूट रचना से साप्ताहिक बाजार पर कब्जे की साज़िश, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
कागजों में हेरफेर का गंभीर आरोप, पूरा सिस्टम सवालों में

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 13 जून 2026
Kotmi Kala में दशकों पुराना साप्ताहिक बाजार अब एक बड़े भू-विवाद और कथित जमीन घोटाले के आरोपों के बीच घिर गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बाजार की शासकीय और निजी जमीन को सुनियोजित तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में कूट रचना कर बदल दिया गया है, जिससे पूरे बाजार के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है।

कागजों में हेरफेर का गंभीर आरोप, पूरा सिस्टम सवालों में
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल सीमांकन या विवाद का नहीं बल्कि एक संगठित जमीन हड़पने की प्रक्रिया जैसा है। आरोप है कि खसरा, नक्शा और मिसल जैसे महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों में जानबूझकर बदलाव किए गए, ताकि वास्तविक स्वामित्व और उपयोग को बदला जा सके। ग्रामीणों के अनुसार बाजार की जिस जमीन पर वर्षों से साप्ताहिक हाट लगती रही है, उसे धीरे-धीरे रिकॉर्ड में अलग रूप देकर निजी या विवादित श्रेणी में डालने की कोशिश की गई है।

राजस्व तंत्र पर सीधा सवाल, मिलीभगत के आरोप तेज
इस पूरे मामले में पटवारी और राजस्व निरीक्षक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इतने बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड में बदलाव बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं है। ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संरक्षण प्राप्त नेटवर्क द्वारा जमीन पर कब्जे की कोशिश हो सकती है, जिसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

विवादित खसरे और जमीन पर दावे तेज
ग्रामीणों ने जिन खसरा नंबरों को विवाद का केंद्र बताया है, उनमें 110/8, 110/9, 110/10, 111/1 और 111/11 प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरोप है कि इन जमीनों में से कुछ शासकीय श्रेणी की हैं, जबकि कुछ निजी और संस्थागत जमीनों को भी रिकॉर्ड में बदलकर विवाद खड़ा किया गया है।इसी क्रम में यूनाइटेड क्रिश्चियन सोसायटी की जमीन को लेकर भी दावे और प्रतिदावे सामने आए हैं, जिससे विवाद और अधिक जटिल हो गया है।
बाजार की जिंदगी पर सीधा असर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था संकट में
Kotmi Kala का साप्ताहिक बाजार केवल व्यापार का स्थान नहीं बल्कि आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। यहां हर मंगलवार लगने वाला बाजार सैकड़ों छोटे दुकानदारों, किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की रोज़ी-रोटी का मुख्य साधन है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह जमीन विवाद और कथित कब्जे की स्थिति नहीं रोकी गई तो इसका सीधा असर हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा और पूरा ग्रामीण तंत्र प्रभावित हो सकता है।
कलेक्टर कार्यालय में तीखी शिकायत, जांच की मांग तेज
ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग रखी है। उनका कहना है कि इस प्रकरण में फोरेंसिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच जरूरी है ताकि यह साफ हो सके कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे और किसके माध्यम से किए गए। साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण या कब्जे पर तत्काल रोक लगाई जाए और शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी से बढ़ा दबाव
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द और सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्र में यह मामला अब तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है।









