RTI ने खोली रजिस्ट्री सिस्टम की परतें! गाइडलाइन की प्रति नहीं, फिर भी बढ़े हुए बाजार मूल्य पर रजिस्ट्री? आखिर किस दस्तावेज के आधार पर तय हुआ बाजार मूल्य
जब दस्तावेज उपलब्ध नहीं, तो बढ़े हुए रेट का आधार क्या था?

RTI जवाब ने खड़े किए गंभीर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के उप पंजीयक कार्यालय से प्राप्त एक RTI जवाब ने भूमि पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अवधि में बढ़े हुए बाजार मूल्य के आधार पर जमीनों की रजिस्ट्रियां की गईं, उसी अवधि से संबंधित गाइडलाइन और सरकारी रेट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में कार्यालय ने असमर्थता जाहिर की है।

आवेदक ने मांगी थी बढ़े हुए रेट की प्रमाणित प्रति
RTI आवेदन के माध्यम से ग्राम पेंड्रा के दुर्गा चौक से अमरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में स्थित भूमि के लिए 20 नवंबर 2025 से 26 नवंबर 2025 के बीच लागू सरकारी रेट और उससे संबंधित गाइडलाइन की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी। जवाब में उप पंजीयक कार्यालय ने बताया कि केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की गाइडलाइन की प्रमाणित प्रति उनके पास उपलब्ध नहीं है और इसकी मांग जिला पंजीयक कार्यालय से की गई है।

जब दस्तावेज उपलब्ध नहीं, तो बढ़े हुए रेट का आधार क्या था?
यहीं से पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल शुरू होता है। यदि संबंधित गाइडलाइन की प्रमाणित प्रति कार्यालय के पास उपलब्ध नहीं थी, तो उसी अवधि में बढ़े हुए बाजार मूल्य का निर्धारण आखिर किस आधार पर किया गया? क्या कोई आदेश, अधिसूचना या अन्य अधिकृत दस्तावेज मौजूद था, जिसके आधार पर रजिस्ट्रियां की गईं? यदि था तो उसकी प्रति सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई?

लाखों की वसूली, लेकिन आधार दस्तावेज नहीं?
भूमि रजिस्ट्री के दौरान बाजार मूल्य का सीधा असर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क पर पड़ता है। ऐसे में यदि नागरिकों से बढ़े हुए बाजार मूल्य के आधार पर शुल्क वसूला गया, तो उसका आधार रिकॉर्ड और दस्तावेज विभागीय अभिलेखों में आसानी से उपलब्ध होना चाहिए था। RTI जवाब ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि जिस आधार पर आर्थिक भार डाला गया, उसका दस्तावेज आखिर कहां है?
पारदर्शिता पर उठे सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है। लेकिन इस मामले में जवाब ने जानकारी देने से ज्यादा नए संदेह पैदा कर दिए हैं। यदि बढ़े हुए रेट के निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक और रिकॉर्ड आधारित थी, तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में कठिनाई क्यों आई?
क्या रिकॉर्ड प्रबंधन में बड़ी लापरवाही हुई है?
उप पंजीयक कार्यालय का यह कहना कि संबंधित गाइडलाइन की प्रमाणित प्रति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, रिकॉर्ड प्रबंधन की स्थिति पर भी सवाल खड़े करता है। जिस दस्तावेज के आधार पर भूमि का मूल्यांकन और पंजीयन किया जाता है, उसका रिकॉर्ड संबंधित कार्यालय में तत्काल उपलब्ध होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी मानी जा सकती है।
अब जवाब देना होगा विभाग को
RTI के इस जवाब के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि 20 नवंबर 2025 से 26 नवंबर 2025 के बीच बढ़े हुए बाजार मूल्य का निर्धारण आखिर किस दस्तावेज, आदेश या अधिकृत गाइडलाइन के आधार पर किया गया? जब गाइडलाइन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं है, तो जनता यह जानना चाहती है कि बढ़े हुए रेट पर की गई रजिस्ट्रियों का वास्तविक आधार क्या था।
सबसे बड़ा सवाल
“गाइडलाइन की प्रति नहीं, लेकिन बढ़े हुए बाजार मूल्य पर रजिस्ट्री! आखिर किस दस्तावेज के आधार पर तय हुआ बाजार मूल्य?”
RTI के इस जवाब ने पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि विभाग इस सवाल का दस्तावेजी जवाब देता है या फिर मामला केवल फाइलों और पत्राचार तक ही सीमित रह जाता है।









