LIVE UPDATE

Gaurela pendra marwahi “मड़ई की जमीन, सेखवा का NOC और फाइल में दस्तावेज गायब! शंकर प्रजापति से जुड़ा डाइवर्सन मामला, मरवाही SDM कार्यालय में बड़ा खेल?”

“नक़ल मांगने पर खुलासा—फाइल में पंचायत का NOC संलग्न ही नहीं, फिर किस आधार पर जारी हुआ डाइवर्सन आदेश?”

“जमीन मड़ई पंचायत की, लेकिन डाइवर्सन में सेखवा पंचायत का NOC दिखाया गया—और जब नकल मांगी गई तो जवाब मिला कि फाइल में कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र संलग्न ही नहीं है!”   यहीं से शुरू होता है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही अनुभाग का एक ऐसा मामला, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरा मामला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के तहसील सकोला स्थित ग्राम पंचायत मड़ई की भूमि खसरा नंबर 236/7, रकबा 2.023 हेक्टेयर से जुड़ा है, जो राजस्व रिकॉर्ड में बेबीलता, पति शंकर प्रसाद के नाम पर दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि वर्ष 2022 में इस जमीन का डाइवर्सन संदिग्ध परिस्थितियों में कराया गया।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

नियमों के अनुसार किसी भी भूमि के डाइवर्सन के लिए संबंधित ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) आवश्यक माना जाता है। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फाइल में पंचायत का NOC मौजूद ही नहीं है, तो डाइवर्सन आदेश किस आधार पर जारी किया गया?जानकारी के अनुसार भूमि ग्राम पंचायत मड़ई में स्थित है, लेकिन तत्कालीन मरवाही SDM द्वारा जारी आदेश में ग्राम पंचायत सेखवा में उद्घोषणा प्रकाशन कराए जाने का उल्लेख किया गया। यह तथ्य न केवल विरोधाभासी है बल्कि पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

ग्राम पंचायत मड़ई के सरपंच के अनुसार संबंधित भूमि विवादित है, और इसी वजह से पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलना संभव नहीं था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक सुनियोजित तरीके से भूमि को दूसरी पंचायत (सेखवा) का दर्शाकर डाइवर्सन प्रक्रिया पूरी कराई गई।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब एसडीएम कार्यालय की नकल शाखा से डाइवर्सन प्रकरण में संलग्न पंचायत NOC की प्रमाणित प्रति मांगी गई। लिखित जवाब में साफ कहा गया कि संबंधित फाइल में कोई भी अनापत्ति प्रमाणपत्र संलग्न नहीं है। यह जवाब सीधे-सीधे डाइवर्सन आदेश में किए गए उल्लेख को झूठा साबित करता है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल लापरवाही है या फिर दस्तावेजों में कूट रचना कर नियमों को दरकिनार किया गया? क्या बिना आवश्यक दस्तावेजों के डाइवर्सन आदेश जारी करना संभव है, या फिर इसके पीछे विभागीय स्तर पर मिलीभगत है?

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन मरवाही SDM कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है उनका कहना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इस तरह का डाइवर्सन संभव नहीं हो सकता।

विवादित भूमि की भू-स्वामी के रूप में सेखवा निवासी बेबीलता प्रजापति का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि उनके पति शंकर प्रजापति पेशे से शिक्षक हैं और जिले में भूमि से जुड़े विवादों को लेकर पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ मामलों में सरकारी जमीन को निजी भूमि में बदलकर बैंक से बड़ी राशि के ऋण लेने के प्रयास किए गए, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

फिलहाल यह मामला पूरे जिले में सुर्खियों में है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले की ईमानदारी से जांच की जाती है, तो न केवल सच्चाई सामने आएगी बल्कि राजस्व विभाग के भीतर की कार्यप्रणाली भी उजागर होगी।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को दबाता है या फिर सच्चाई को सामने लाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है। यह मामला केवल एक जमीन का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *