LIVE UPDATE

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी विवादित आदिवासी जमीन पर राखड़ पटिंग? न्यायालय की अवमानना या भूमाफियाओं-राजस्व तंत्र का संगठित खेल?

राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों का खेल और प्रशासनिक संरक्षण के दम पर आदिवासी जमीनों को कब्जाने की कोशिश

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी विवादित आदिवासी जमीन पर राखड़ पटिंग? न्यायालय की अवमानना या भूमाफियाओं-राजस्व तंत्र का संगठित खेल?

निःसंतान आदिवासी की जमीन पर कब्जे की पटकथा, रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और करोड़ों की सौदेबाजी के आरोप

ये खबर भी पढ़ें…
कोरबा में बवाल: दिग्गज भाजपा नेता व जनपद उपाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जाखड़ पर महिला से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप, इसी साल लगा था दुष्कर्म-हत्या का दाग?
कोरबा में बवाल: दिग्गज भाजपा नेता व जनपद उपाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जाखड़ पर महिला से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप, इसी साल लगा था दुष्कर्म-हत्या का दाग?
July 11, 2026
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ जनपद उपाध्यक्ष और भाजपा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

कोरबा/कटघोरा।कोरबा जिले में भूमाफियाओं के हौसले अब इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न न्यायालय का डर रह गया है और न ही कानून का सम्मान। कटघोरा क्षेत्र के ग्राम तानाखार से सामने आया एक मामला यह बताने के लिए काफी है कि किस तरह राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों का खेल और प्रशासनिक संरक्षण के दम पर आदिवासी जमीनों को कब्जाने की कोशिश की जा रही है। मामला विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत तानाखार स्थित नेशनल हाईवे-130 किनारे की बहुमूल्य भूमि से जुड़ा हुआ है। खसरा नंबर 228/5, रकबा लगभग 5 एकड़ भूमि को लेकर “रूप सिंह बनाम फगनी बाई व अन्य” प्रकरण क्रमांक 93A/2023 कटघोरा व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कथित भूमाफियाओं द्वारा विवादित जमीन पर खुलेआम राखड़ पटिंग कराई जा रही है।

ये खबर भी पढ़ें…
बड़ी खबर: जाखड़ मामले की गाज या प्रशासनिक सर्जरी? कोरबा SP का बड़ा एक्शन; महिला थाना प्रभारी लाइन हाजिर, पसान टीआई भी हटाए गए!
बड़ी खबर: जाखड़ मामले की गाज या प्रशासनिक सर्जरी? कोरबा SP का बड़ा एक्शन; महिला थाना प्रभारी लाइन हाजिर, पसान टीआई भी हटाए गए!
July 13, 2026
कोरबा। जिला पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिस महकमे में एक बड़ा फेरबदल किया है। एसपी द्वारा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जब मामला न्यायालय में लंबित है तो विवादित भूमि पर काम किसकी अनुमति से चल रहा है? क्या कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है? या फिर भूमाफियाओं को सत्ता और सिस्टम का ऐसा संरक्षण प्राप्त है कि उन्हें अदालत तक का भय नहीं?

पंचायत को गुमराह कर ली गई एनओसी!

ये खबर भी पढ़ें…
नदियों को खोखला करने वाले सौदागरों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! तहसीलदार ने पकड़ा 100 ट्रैक्टर रेत का अवैध जखीरा, माफियाओं में मची खलबली!
नदियों को खोखला करने वाले सौदागरों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! तहसीलदार ने पकड़ा 100 ट्रैक्टर रेत का अवैध जखीरा, माफियाओं में मची खलबली!
July 13, 2026
कोटमर्रा (कोरबा): कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत पसान क्षेत्र में सोमवार को तहसील प्रशासन ने अवैध रेत कारोबार...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सूत्र बताते हैं कि संबंधित लोगों ने ग्राम पंचायत से तथ्य छिपाकर एनओसी हासिल कर ली थी। पंचायत को यह नहीं बताया गया कि भूमि न्यायालयीन विवाद में है। बाद में जब वास्तविक स्थिति सामने आई, तब पंचायत ने एनओसी निरस्त कर दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एनओसी निरस्त होने के बाद भी जमीन पर गतिविधियां जारी रहीं। यहां सबसे गंभीर सवाल पंचायत, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर खड़े हो रहे हैं। आखिर विवादित जमीन पर भारी स्तर पर राखड़ पटिंग जैसी गतिविधि बिना प्रशासनिक जानकारी के कैसे चल सकती है? क्या संबंधित विभाग जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?

आदिवासी की जमीन पर कब्जे का खेल?

इस पूरे मामले की जड़ में एक निःसंतान आदिवासी परिवार की जमीन बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार भूमि मूल रूप से अनुसूचित जनजाति वर्ग के घासीराम पिता दादूराम गोंड़ के नाम दर्ज थी। आरोप है कि उनकी मृत्यु के बाद वास्तविक उत्तराधिकारियों को दरकिनार कर मिलते-जुलते नाम और पिता के नाम का सहारा लेकर जमीन को दूसरे लोगों के नाम चढ़ाने की साजिश रची गई। बताया जा रहा है कि स्वर्गीय घसीराम पिता दयाराम के पुत्र इतवार सिंह सहित कुछ लोगों द्वारा करोड़ों रुपए कीमत वाली इस जमीन को बेचने की तैयारी की जा रही है। जबकि रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से घासीराम पिता दादूराम गोंड़ दर्ज हैं।

पटवारी प्रतिवेदन और वर्ष 1926-28 के मिसल रिकॉर्ड में भी घासीराम को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताया गया है। इसके बावजूद पोड़ी-उपरोड़ा के तत्कालीन तहसीलदार द्वारा कथित रूप से इन तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए ऐसा आदेश पारित किया गया, जिससे वास्तविक हकदारों के अधिकार प्रभावित हुए और दूसरे पक्ष को लाभ पहुंचाने का रास्ता खुल गया।

फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से खड़ा हुआ बड़ा संदेह

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार घासीराम की मृत्यु से जुड़े दो अलग-अलग प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। एक प्रमाण पत्र में पिता का नाम दादूराम दर्ज है, जबकि दूसरे में दयाराम लिखा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि दोनों प्रमाण पत्रों में मृत्यु की तिथि और ग्राम पंचायत एक ही है। ऐसे में यह आशंका और गहरा जाती है कि सचिव स्तर से लेकर तहसील कार्यालय तक रिकॉर्ड में सुनियोजित तरीके से हेरफेर किया गया है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल जमीन फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि सरकारी दस्तावेजों के साथ आपराधिक छेड़छाड़ का गंभीर मामला माना जाएगा।

करोड़ों की जमीन, भूमाफियाओं की नजर

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेशनल हाईवे किनारे स्थित यह जमीन अब करोड़ों रुपए की हो चुकी है और इसी कारण भूमाफियाओं की नजर इस पर टिक गई है। आरोप यह भी है कि कुसमुंडा निवासी कुछ लोगों की भूमिका भी संदिग्ध है, जिनके जरिए जमीन खरीद-फरोख्त का खेल खेला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में आदिवासी और गरीब परिवारों की जमीनें सुरक्षित नहीं रह जाएंगी। लोगों का आरोप है कि भूमाफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि वे न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बेखौफ होकर जमीन पर कब्जे और व्यवसायिक गतिविधियां चला रहे हैं।

सवालों के घेरे में राजस्व विभाग

पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। आखिर रिकॉर्ड में नाम और जाति संबंधी इतनी बड़ी विसंगतियां कैसे हुईं? न्यायालयीन विवाद की जानकारी के बावजूद जमीन पर गतिविधियां क्यों नहीं रोकी गईं?पंचायत को वास्तविक तथ्य क्यों नहीं बताए गए? फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर किसके दबाव में कार्रवाई की गई?और सबसे बड़ा सवाल — क्या इस पूरे खेल में विभागीय मिलीभगत है?

उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की मांग

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि मिसल बंदोबस्त से लेकर वर्तमान रिकॉर्ड तक की जांच वंशवृक्ष के आधार पर कराई जाए और जिन अधिकारियों, कर्मचारियों, सचिवों या दलालों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। फिलहाल तानाखार की यह विवादित जमीन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कोर्ट में लंबित आदिवासी भूमि पर राखड़ पटिंग और सौदेबाजी किसके संरक्षण में हो रही है?अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या फिर भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभाव के आगे कानून, राजस्व व्यवस्था और न्यायालय—तीनों बौने साबित होंगे।

A Pranav

professional journalist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *