कटघोरा, कोरबा- SECL की बगदेवा कोयला खदान में कथित चोरी का बड़ा खेल! दिन-रात मोटरसाइकिलों से कोयले की ढुलाई, कटघोरा के बाजार तक पहुंचने का दावा; रोजाना ₹4–5 लाख के नुकसान का आरोप!

रितेश गुप्ता | लल्लनगुरु न्यूज़—कटघोरा, कोरबा। कोयला उत्पादन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच SECL की बगदेवा भूमिगत कोयला खदान से कथित तौर पर कोयले की चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि खदान से दिन और रात मोटरसाइकिलों के जरिए कोयला बाहर निकाला जा रहा है और फिर कटघोरा क्षेत्र के उद्योगों, होटल-व्यवसायियों, ईंट-भट्ठों सहित अन्य स्थानों पर इसकी खपत और बिक्री की जा रही है। इस कथित अवैध कारोबार से प्रतिदिन लगभग 4 से 5 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया जा रहा है। यदि यह दावा जांच में सही साबित होता है, तो मामला केवल कोयले की चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खदान की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और कथित अवैध खरीद-बिक्री के नेटवर्क की भी गंभीर जांच जरूरी होगी।
दिन हो या रात, मोटरसाइकिलों से कोयले की ढुलाई का आरोप

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, बगदेवा खदान से मोटरसाइकिलों के जरिए कोयला निकालकर आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद कथित रूप से इस कोयले को विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक बेचा जाता है। सवाल यह है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लगातार संचालित हो रही हैं, तो खदान के आसपास निगरानी करने वाले सुरक्षा कर्मियों और संबंधित अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या खदान से बाहर निकलने वाले रास्तों पर नियमित जांच होती है? क्या संदिग्ध आवाजाही की निगरानी और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था प्रभावी है? इन सवालों का जवाब संबंधित प्रबंधन को देना चाहिए।
कटघोरा के उद्योगों, होटलों और ईंट-भट्ठों तक पहुंचने का दावा

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित तौर पर चोरी किए गए कोयले की खपत और बिक्री है। आरोप है कि खदान से निकाला गया कोयला कटघोरा के उद्योगों, होटल-व्यवसायियों, ईंट-भट्ठों और अन्य स्थानों पर पहुंचाया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है, तो जांच केवल खदान परिसर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कोयले की कथित खरीद-बिक्री, उसके भंडारण, परिवहन और भुगतान के तरीकों की भी पड़ताल आवश्यक है। हालांकि, फिलहाल किसी विशेष कारोबारी या प्रतिष्ठान की संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए संबंधित खरीदारों की भूमिका जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।
रोजाना ₹4–5 लाख का नुकसान! आखिर किस आधार पर?

कथित कोयला चोरी से प्रतिदिन 4 से 5 लाख रुपये के नुकसान का दावा अपने आप में गंभीर है। लेकिन इस राशि की वास्तविकता जानने के लिए चोरी किए गए कोयले की मात्रा, उसकी गुणवत्ता, बाजार मूल्य और कथित बिक्री के रिकॉर्ड का सत्यापन आवश्यक है। यदि प्रतिदिन इतना नुकसान हो रहा है, तो एक सप्ताह और एक महीने में नुकसान का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। हालांकि, आधिकारिक आकलन और विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में इस रकम को अभी पुष्ट नुकसान नहीं, बल्कि जांच योग्य दावा माना जाना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, जवाबदेही किसकी?
SECL की बगदेवा भूमिगत कोयला खदान, कोरबा एरिया से संबंधित परियोजना के रूप में सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। <Cite refs={[“turn789587search2”,“turn789587search19”]}/> ऐसे में कथित चोरी के आरोपों पर खदान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि खदान की परिधि, प्रवेश-निकास मार्गों और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की क्या व्यवस्था है। क्या हाल के दिनों में कोयले के अनधिकृत परिवहन की कोई शिकायत मिली है? क्या सुरक्षा रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और गश्त रजिस्टर की जांच कराई जा सकती है? इन सवालों पर आधिकारिक जवाब सामने आना जरूरी है।
जांच खदान से लेकर कथित खरीदारों तक हो
यदि मोटरसाइकिलों के माध्यम से कोयले की चोरी और बिक्री के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिस, SECL प्रबंधन और अन्य सक्षम एजेंसियों को समन्वित जांच करनी चाहिए। जांच में कथित चोरी के रास्तों, कोयले की मात्रा, परिवहन, भंडारण, बिक्री और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल होनी चाहिए। दोषियों की भूमिका साक्ष्यों से स्थापित होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, शिकायत की निष्पक्ष जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति या कारोबारी को बिना प्रमाण दोषी ठहराने से बचना भी जरूरी है।
अब SECL प्रबंधन से सीधे सवाल
बगदेवा खदान से कथित तौर पर दिन-रात कोयला बाहर निकाले जाने के आरोपों पर क्या प्रबंधन जांच कराएगा? क्या सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी? क्या कथित रूप से चोरी किए गए कोयले की खरीद-बिक्री के नेटवर्क का पता लगाया जाएगा? और सबसे अहम—प्रतिदिन 4–5 लाख रुपये के नुकसान के दावे की वास्तविकता सामने लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
इन सवालों का जवाब केवल बयान से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई से मिलना चाहिए। यदि आरोप सही हैं, तो यह सार्वजनिक संपदा की सुरक्षा और जवाबदेही का गंभीर विषय है। लल्लनगुरु न्यूज़ इस मामले में SECL प्रबंधन और संबंधित प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।









