अटल प्रतिमा विवाद में कांग्रेस के दो चेहरे! कटघोरा में फ्रंटफुट पर, GPM में बैकफुट पर क्यों? एक ही मुद्दा, दो जिलों में अलग-अलग तेवर—कटघोरा में आंदोलन, GPM में खामोशी; सियासी मजबूरी या रणनीति?
कटघोरा में युवा कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, मरवाही में मरम्मत के बाद खामोशी!

कटघोरा में अटल प्रतिमा पर संग्राम, मरवाही में मरम्मत से मामला ‘रफा-दफा’! कांग्रेस के दो जिलों में दोहरे तेवर क्यों?कटघोरा में युवा कांग्रेस सड़क पर, GPM में दिग्गजों से लेकर युवा नेताओं तक की खामोशी पर सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/कटघोरा। अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर छिड़ा विवाद अब महज प्रतिमा निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक सक्रियता का मुद्दा बनता जा रहा है। कटघोरा नगर पालिका में प्रतिमा निर्माण को लेकर कथित अनियमितताओं के खिलाफ युवा कांग्रेस ने शुक्रवार को अर्धनग्न प्रदर्शन कर प्रशासन को घेरा और उच्च स्तरीय जांच के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

लेकिन इसी बीच मरवाही में अटल प्रतिमा से जुड़े मामले में सामने आया घटनाक्रम एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है। यहां प्रतिमा में मरम्मत कराए जाने के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा है। यही अंतर अब कई सवालों को जन्म दे रहा है—क्या सिर्फ मरम्मत करा देना पर्याप्त है, या फिर यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर प्रतिमा की ऐसी स्थिति बनी क्यों?
कटघोरा में उप-अभियंता निलंबित, लेकिन CMO और ठेकेदार पर कार्रवाई कब?

कटघोरा मामले में उप-अभियंता को निलंबित किया जा चुका है। लेकिन कार्रवाई के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। युवा कांग्रेस का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य में कथित अनियमितता के लिए उप-अभियंता की जिम्मेदारी बनती है, तो फिर नगर पालिका के CMO और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की भी जांच क्यों नहीं की जा रही? निर्माण कार्य किसी एक व्यक्ति के स्तर पर पूरा नहीं होता। इसमें तकनीकी निगरानी से लेकर कार्य की स्वीकृति, गुणवत्ता की जांच, ठेकेदार की भूमिका और भुगतान जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर देना क्या पूरी जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त है?
युवा कांग्रेस इसी सवाल को लेकर आंदोलन कर रही है और मांग कर रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच हो तथा जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

‘छोटे अधिकारी’ पर गाज, बड़े जिम्मेदारों पर क्यों नरमी?
कटघोरा मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई की शुरुआत उप-अभियंता के निलंबन से हुई, लेकिन अब निगाहें CMO और ठेकेदार की भूमिका पर टिक गई हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता हुई थी, तो क्या उसकी जिम्मेदारी सिर्फ तकनीकी अधिकारी की थी? क्या ठेकेदार की भूमिका की जांच हुई? क्या नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी की थी? जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक कार्रवाई अधूरी दिखाई देने की बात कही जा सकती है।
मरवाही में प्रतिमा की मरम्मत, लेकिन असली सवाल जस का तस
दूसरी ओर मरवाही में अटल प्रतिमा को लेकर सामने आए विवाद के बाद प्रतिमा की मरम्मत करा दी गई। मरम्मत के बाद भले ही प्रतिमा का स्वरूप ठीक दिखाई देने लगे, लेकिन असली सवाल इससे खत्म नहीं होता। सवाल यह है कि प्रतिमा में खराबी आई क्यों? निर्माण या स्थापना में कोई कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी? क्या पूरे मामले की तकनीकी जांच हुई? क्या जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की गई? अगर सिर्फ क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर दी गई और मूल कारण की जांच नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा सामने आने की आशंका से इनकार कैसे किया जा सकता है?
कटघरा प्रशासन के साथ अब कांग्रेस संगठन भी सवालों में
अटल प्रतिमा विवाद ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कांग्रेस संगठन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कटघोरा में युवा कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए आंदोलन का रास्ता चुना है। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस संगठन के दिग्गज और युवा नेताओं की सक्रियता अपेक्षाकृत कम नजर आने पर सवाल उठ रहे हैं।राजनीतिक सवाल यह है कि जब प्रतिमा से जुड़ा मामला दूसरे स्थान पर आंदोलन का मुद्दा बन सकता है, तो मरवाही में वही मुद्दा राजनीतिक रूप से उतनी मजबूती से क्यों नहीं उठाया गया?
कटघोरा में सड़क पर युवा कांग्रेस, GPM में नेता आखिर चुप क्यों?
कटघोरा में युवा कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन यह दिखाता है कि संगठन का एक हिस्सा इस मामले को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन GPM में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से लेकर युवा नेताओं तक की खामोशी अब चर्चा का विषय बन रही है। क्या GPM कांग्रेस के पास इस मामले को लेकर कोई अलग रणनीति है? क्या संगठन प्रशासन से जवाब मांगने के बजाय मामले के शांत होने का इंतजार कर रहा है? या फिर मरवाही के मामले में कांग्रेस नेतृत्व को कोई राजनीतिक या संगठनात्मक वजह से दूरी बनाए रखना उचित लग रहा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल कांग्रेस संगठन की ओर से सामने नहीं आया है।
अटल जी की प्रतिमा है, फिर जवाबदेही पर इतनी चुप्पी क्यों?
अटल बिहारी वाजपेयी देश के पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं और उनकी प्रतिमा किसी भी शहर या नगर के लिए सम्मान और सार्वजनिक स्मृति का प्रतीक है। ऐसे में प्रतिमा निर्माण, गुणवत्ता या रखरखाव को लेकर यदि सवाल उठते हैं, तो उनका जवाब सिर्फ मरम्मत या निलंबन तक सीमित नहीं होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की जांच हो तथा यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर गलती कहां हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
अब सवाल—मरम्मत से संतुष्ट होगा प्रशासन या खुलेगी पूरी फाइल?
कटघोरा में आंदोलन ने जहां प्रशासन के सामने कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ा दिया है, वहीं मरवाही में मरम्मत के बाद मामले की जांच और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन दोनों मामलों में समान मापदंड अपनाता है या नहीं। क्या कटघोरा की तरह मरवाही में भी जिम्मेदारी तय होगी? क्या निर्माण से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच होगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या राजनीतिक संगठन भी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे?
क्योंकि सवाल सिर्फ एक प्रतिमा की मरम्मत का नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी धन से बने सार्वजनिक निर्माण में यदि गड़बड़ी होती है, तो क्या सिर्फ एक अधिकारी को निलंबित कर या प्रतिमा की मरम्मत कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी? कटघोरा में आंदोलन ने जवाबदेही की मांग को सड़क पर ला दिया है, अब निगाहें मरवाही और GPM कांग्रेस पर हैं—क्या वहां भी आवाज उठेगी या अटल प्रतिमा का विवाद मरम्मत की परत के नीचे दबा दिया जाएगा?









