PENDRA -इस्तीफा मंजूर, फिर भी कुर्सी बरकरार! देवरीकला सहकारी समिति में प्रभारी प्रबंधक चंद्रकांत की नियुक्ति पर बड़ा बवाल,,,,कलेक्टर को शिकायत, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल; जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, देवरीकला में प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर अब सवाल सीधे जिला प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गए हैं। इस्तीफा स्वीकार होने के बावजूद उसी व्यक्ति को दोबारा प्रभारी प्रबंधक की जिम्मेदारी दिए जाने के आरोप ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले को लेकर कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
इस्तीफा स्वीकार हुआ तो फिर ‘प्रभारी’ कैसे?

शिकायत में कहा गया है कि समिति के प्रभारी प्रबंधक चंद्रकांत सलाम ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त इस्तीफा कलेक्टर एवं सहायक पंजीयक, सहकारी संस्थाएं द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया था। इसके बावजूद उन्हें पुनः प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्य करने दिया जा रहा है। यही पूरा मामला अब सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है—जब इस्तीफा स्वीकार हो चुका था, तो दोबारा जिम्मेदारी देने का आदेश किसने जारी किया? किस नियम के तहत जिम्मेदारी दी गई? और क्या इसके लिए विधिवत नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई गई?
नियम-कायदे ताक पर रखे गए या सब कुछ नियमों के मुताबिक?

आवेदन में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या पुनः प्रभारी बनाने से पहले सहकारी अधिनियम एवं नियमों के तहत नई चयन/नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई गई थी? क्या समिति से विधिवत प्रस्ताव लिया गया? क्या सक्षम प्राधिकारी ने इसका अनुमोदन किया? यदि इन सवालों का जवाब दस्तावेजों में नहीं मिलता है तो नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
कलेक्टर से जांच के साथ कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही इस्तीफे से लेकर उसकी स्वीकृति और उसके बाद दोबारा प्रभारी प्रबंधक बनाए जाने तक के सभी आदेशों एवं दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। आवेदन में साफ कहा गया है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कड़ी कार्रवाई की जाए। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। क्या प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर दस्तावेज खंगालेगा या फिर सहकारी समिति से जुड़े इस विवाद पर पर्दा पड़ा रहेगा? आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही तस्वीर साफ होगी।








