गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : शासकीय नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा? 2006 की शिक्षाकर्मी भर्ती में जमा दस्तावेजों पर उठे गंभीर सवाल

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | 31 जुलाई 2026
जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में शासकीय नियुक्तियों में पारदर्शिता और साख को तार-तार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 2006 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती में प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर अब गहरा संदेह मंडराने लगा है। मामला जनपद पंचायत गौरेला के तहत प्राथमिक शाला बालक जोगीसार में पदस्थ महिला शिक्षिका से जुड़ा है, जिनके द्वारा नियुक्ति के समय जमा की गई अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APS), रीवा (म.प्र.) की अंकसूचियों और ‘लब्धांक पत्रम्’ को फर्जी और कूटरचित होने की आशंका जताई जा रही है। इस गंभीर मामले की शिकायत सीधे कलेक्टर महोदय से की गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

फर्जीवाड़े की बू: दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया मिलीं भारी विसंगतियां
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति आदेश क्रमांक 628 (दिनांक 13.07.2006) के तहत की गई इस नियुक्ति में पेश किए गए शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का जब सूक्ष्म अवलोकन किया गया, तो उसमें एक-दो नहीं बल्कि कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। अभ्यर्थी के नाम, रोल नंबर, अनुक्रमांक, प्राप्तांक और जन्मतिथि जैसे मूलभूत विवरणों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, जिस अवधि की अंकसूची प्रस्तुत की गई है, उस दौरान संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा 11वीं, 12वीं या उत्तर मध्यमा की परीक्षाएं आयोजित की भी जाती थीं या नहीं, इस पर भी गहरा संशय है। दस्तावेजों की अध्ययन पद्धति और विषय संयोजन भी विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते दिख रहे हैं, जो स्पष्ट रूप से एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रहे हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग: विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से होगा दूध का दूध और पानी का पानी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर से मांग की गई है कि वे जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल निर्देशित कर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से सीधा अभिलेखीय सत्यापन (Official Record Verification) कराएं। केवल विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से बिंदुवार मिलान के बाद ही इन दस्तावेजों की असली सच्चाई सामने आ सकती है। शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, इसलिए 2006 की पूरी भर्ती फाइल, चयन सूची और आवेदन पत्रों को तत्काल सील कर सुरक्षित रखने की मांग की गई है ताकि सच को छुपाया न जा सके।

क्या बैकडेटेड फर्जीवाड़े पर गिरेगी गाज? वैधानिक कार्रवाई की तैयारी
शासकीय तंत्र में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हथियाने का यह मामला बेहद गंभीर है। शिकायत पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि सत्यापन रिपोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेज कूटरचित या असत्य पाए जाते हैं, तो केवल सेवा समाप्ति ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और शासकीय रिकॉर्ड में हेराफेरी की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए। अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस सनसनीखेज शिकायत पर कितनी तेजी से एक्शन लेता है और रीवा विश्वविद्यालय से आने वाली सत्यापन रिपोर्ट क्या नया मोड़ लाती है।








