कटघोरा में ‘जंगल राज’! वन अफसरों पर तस्करी के आरोप, शिकायतों पर भी चुप्पी क्यों?
सरई पेड़ों की खुली लूट: डिप्टी रेंजर पर गंभीर आरोप, सिस्टम पर लीपापोती के सवाल

कोरबा। कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत लैंगा वन परिसर में वन विभाग खुद कटघरे में है। जिन पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, उन्हीं अधिकारियों पर अब जंगल उजाड़ने और तस्करी कराने के आरोप लग रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि महीनों से शिकायतें हो रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खामोशी नजर आ रही है।


बीट गार्ड रामकुमार कोराम और डिप्टी रेंजर उषा सोनवानी पर सीधे तौर पर सरई पेड़ों की अवैध कटाई और बिक्री में शामिल होने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि खुलेआम 10,000 रुपये लेकर 10 पेड़ों की कटाई करवाई गई। विरोध करने वाली रेशम बाई पंडो की बात भी अनसुनी कर दी गई, जिससे पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर होती है।
ग्रामीणों ने वन विभाग के दफ्तर से लेकर राजस्व विभाग तक गुहार लगाई, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। सवाल यह है कि जब इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, तो क्या यह पूरा मामला अंदरखाने दबाया जा रहा है?

अक्टूबर 2025 से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन आज तक न तो किसी को सस्पेंड किया गया और न ही जांच की स्थिति सार्वजनिक की गई। इससे साफ है कि या तो सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है या फिर जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।
पसान रेंजर मनीष सिंह खुद मान चुके हैं कि डिप्टी रेंजर के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं और जांच रिपोर्ट भी सौंप दी गई है। इसके बावजूद कार्रवाई का अता-पता नहीं होना कई बड़े सवाल खड़े करता है। अब सवाल सिर्फ पेड़ों की कटाई का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?










