“सागौन कटाई पर मौन, गरीब आदिवासियों पर बुलडोजर!” मरवाही में वन विभाग की कार्रवाई पर कांग्रेस का बड़ा हमला, प्रदेश अध्यक्ष जनक राम ध्रुव बोले – “भाजपा राज में आदिवासियों को उजाड़ने की साजिश”
यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने की साजिश है?!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही |मरवाही वन मंडल के जंगलों में कथित अवैध सागौन कटाई का मामला अब राजनीतिक विस्फोट बन चुका है। एक तरफ जंगलों से बेशकीमती सागौन गायब होते रहे, दूसरी तरफ वन विभाग की कार्रवाई गरीब आदिवासियों और दलित परिवारों के घरों पर टूट पड़ी। पंडरी पानी गांव में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद बेघर हुए परिवारों का दर्द अब प्रदेश की राजनीति में गूंजने लगा है।
इसी मुद्दे को लेकर बिंद्रानवागढ़ विधायक एवं छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक राम ध्रुव आज पंडरीपानी गांव पहुंचे। वहां उन्होंने उजड़े हुए परिवारों से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी। टूटे मकानों और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर ग्रामीणों को देखकर विधायक ध्रुव ने प्रशासन और भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला।

मीडिया से बातचीत में जनक राम ध्रुव ने कहा कि
“वन विभाग न तो सागौन की अवैध कटाई रोक पाया और न ही आज तक असली दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब गरीब आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग ने उन मकानों को भी नहीं छोड़ा जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे।

“यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने की साजिश है। भाजपा सरकार आने के बाद लगातार आदिवासी विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं।”
विधायक ध्रुव ने चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।

“यदि पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय, मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेगी। आदिवासियों के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ध्रुव अपने समर्थकों और कांग्रेस नेताओं के साथ जिला कलेक्टर संतोष देवांगन से मिलने पहुंचे। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर मांग की कि जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें तत्काल राहत राशि, वैकल्पिक आवास और पुनर्वास दिया जाए।
इस दौरान कांग्रेस नेता और पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग सदस्य अर्चना पोर्ते ने भी कार्रवाई को “अमानवीय” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष गजमती भानू ने कहा कि
“गरीब आदिवासियों को उजाड़कर सरकार किसका हित साध रही है? असली लकड़ी माफिया आज भी खुले घूम रहे हैं।”
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों की सागौन कटाई के असली जिम्मेदार कौन हैं? और क्यों कार्रवाई केवल गरीब ग्रामीणों तक सीमित रह गई? मरवाही का यह मामला अब वन विभाग की कार्यप्रणाली और सरकार की नीयत – दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।









