गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:भाड़ीगढ़ जात्रा महोत्सव में ‘आदि स्वर’ बैंड की शानदार प्रस्तुति, लोक गीतों की धुन पर झूमे दर्शक
स्थानीय बैंड ‘आदि स्वर’ (The Tribal Beat) ने अपनी दमदार प्रस्तुति से पूरे माहौल को बनाया संगीतमय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के भाड़ीगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय आदिवासी संस्कृति एवं भाड़ीगढ़ जात्रा महोत्सव का समापन बेहद उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के साथ हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन स्थानीय बैंड ‘आदि स्वर’ (The Tribal Beat) ने अपनी दमदार प्रस्तुति से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। बैंड की प्रस्तुति इतनी आकर्षक रही कि देर रात तक दर्शक लोकगीतों की धुन पर थिरकते नजर आए।
कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत भाड़ी एवं आदिवासी युवा संगठन जी.पी.एम. के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। समापन दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में ‘आदि स्वर’ बैंड की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रही। जैसे ही बैंड के कलाकारों ने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी और आदिवासी लोकगीतों की शुरुआत की, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा!


बैंड ने अपनी विशेष प्रस्तुति में लगभग 10 लोकगीतों को आधुनिक संगीत के साथ बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया। पारंपरिक मांदर की थाप और आधुनिक बीट्स का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। दर्शकों का उत्साह इतना था कि कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा और माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना रहा।

प्रस्तुति के बाद बैंड के कलाकारों ने आयोजन समिति और क्षेत्रीय जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाड़ीगढ़ जैसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व की बात है। वहीं कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी ‘आदि स्वर’ बैंड की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आदिवासी लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। ‘आदि स्वर’ जैसे युवा बैंड इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।कुल मिलाकर, भाड़ीगढ़ जत्रा महोत्सव का समापन संगीत, संस्कृति और परंपरा के शानदार संगम के साथ हुआ, जिसने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ दी।










