चंद रुपयों की हवस में गर्भवती को तड़पा-तड़पा कर मौत के मुंह में धकेला! डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी और एम्बुलेंस कर्मियों पर FIR, अब सील होगा ‘मौत का कयामतखाना’?”
इलाज नहीं, मौत का सौदा! गर्भवती की मौत के बाद डीडी अस्पताल पर शिकंजा, संचालक अखिलेश तिवारी पर FIR”

अखिलेश तिवारी के ‘डीडी अस्पताल’ में गर्भवती की मौत: फूटा जनता का गुस्सा, संचालक और एम्बुलेंस कर्मियों पर FIR, सील होगा मौत का कुआँ
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
छत्तीसगढ़ के जीपीएम जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद खौफनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र के काले चेहरे को बेनकाब कर दिया है। इलाज के नाम पर नोट छापने और इंसानी जिंदगियों का सौदा करने वाले एक निजी अस्पताल के खौफनाक कारनामे का भंडाफोड़ हुआ है। 22 वर्षीय गर्भवती महिला ज्योति सोनवानी की तड़प-तड़प कर हुई मौत के बाद गौरेला पुलिस ने सेमरा स्थित डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी और उनके दलाल एम्बुलेंस कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव है और प्रशासन अब इस तथाकथित अस्पताल को हमेशा के लिए सील करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गया है।

#कमिशन के चक्कर में ‘मौत के कुएं’ में धकेला गया मरीज*
दिल दहला देने वाली यह पूरी घटना बसंतपुर की है, जहाँ पीड़ित कैलाश कुमार सोनवानी ने अपनी बेटी ज्योति सोनवानी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु की पहले ही मौत हो चुकी है और महिला की हालत भी बेहद नाजुक है, इसलिए उसे बिना वक्त गंवाए तुरंत सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया। लेकिन, सरकारी सिस्टम की चौखट से बाहर निकलते ही रास्ते में ‘मौत के सौदागर’ सक्रिय हो गए। एम्बुलेंस कर्मियों ने बिलासपुर ले जाने के बजाय ज्योति की बिगड़ती हालत का खौफ दिखाकर परिजनों को मानसिक रूप से तोड़ दिया। उन्होंने परिजनों को डराया कि बिलासपुर पहुंचने में बहुत देर हो जाएगी और रास्ते में ही कोई अनहोनी हो सकती है। इसके बाद, एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत मरीज को जिला अस्पताल वापस लाने या सीधे बिलासपुर ले जाने के बजाय, कमिशन के चक्कर में सेमरा स्थित निजी ‘डीडी अस्पताल’ के कयामतखाने में धकेल दिया गया।
तड़पती रही पीड़िता और बंधक बनाकर पैसे वसूलता रहा अस्पताल
परिजनों का आरोप है कि डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी ने ज्योति को पूरी तरह ठीक करने का झूठा दिलासा दिया और इलाज के नाम पर दो लाख रुपये का भारी-भरकम एस्टीमेट थमा दिया। मृत शिशु को बाहर निकालने की आड़ में परिजनों से किश्तों में मोटी रकम वसूली जाने लगी, लेकिन ज्योति की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। हद तो तब हो गई जब मरीज की हालत को लगातार बिगड़ता देख डरे-सहमे परिजनों ने ज्योति को किसी दूसरे बड़े अस्पताल ले जाने की भीख मांगी। इस पर अस्पताल प्रबंधन की घोर दरिंदगी सामने आई और उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक पाई-पाई का पूरा भुगतान नहीं होगा, मरीज को यहाँ से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। सिर्फ और सिर्फ पैसों की हवस के लिए तड़पती हुई ज्योति को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और जब उसकी स्थिति मृतप्राय हो गई, तब अस्पताल ने अपना पल्ला झाड़ते हुए उसे बिलासपुर सिम्स भेज दिया। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और सिम्स में इलाज के दौरान ज्योति ने दम तोड़ दिया।

सड़कों पर उबला खून और बैकफुट पर आए मौत के सौदागर
जैसे ही ज्योति की मौत की खबर इलाके में फैली, स्थानीय जनता और परिजनों का खून उबल पड़ा। आक्रोशित लोगों ने गौरेला-पेंड्रा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन इस कदर उग्र था कि हालात को संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। भारी जनाक्रोश और कानूनी शिकंजे से बुरी तरह डरे अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में हड़पे हुए दो लाख रुपये परिजनों को वापस लौटा दिए, लेकिन जनता का साफ़ कहना है कि पैसों की भीख फेंकने से क्या उस मासूम की जिंदगी वापस आ जाएगी?
अखिलेश तिवारी समेत दोषियों पर कड़ा कानूनी शिकंजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए गौरेला थाना प्रभारी शानिप रात्रे ने बताया कि परिजनों की लिखित शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4) (धोखाधड़ी एवं छल), धारा 125(2) (लापरवाही से जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना) तथा धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत कड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मेडिकल नेग्लिजेंस की तकनीकी जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसके आते ही अस्पताल को सील कर दिया जाएगा। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे खौफनाक खेल में जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टरों की कमिशनखोरी और साठगांठ की भी बू आ रही है, जिसकी जांच भी पुलिस के रडार पर है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार हत्यारों को कब तक सलाखों के पीछे भेजता है, ताकि दोबारा किसी ज्योति को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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