स्वास्थ्य विभाग की लीपापोती जारी? DD अस्पताल सील क्यों नहीं – 2 महिलाओं की मौत के बाद भी सवाल -मिलीभगत, कागज मिटाने और “लक्ष्मी की माया” के आरोप

गौरेला, 12 जून 2026। गौरेला के सेमरा तिराहा स्थित निजी DD अस्पताल में 2 महिलाओं की मौत के बाद भी अस्पताल पर सीलबंदी की कार्रवाई न होने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीधे स्वास्थ्य विभाग पर लीपापोती और मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
5 बड़े सवाल जो जनता पूछ रही है

1. सीलबंदी में इतना विलंब क्यों?*
ज्योति चौधरी और एक अन्य महिला की मौत के आरोप के बाद भी DD अस्पताल को सील नहीं किया गया। लोगों का सवाल – _”आखिर इतना विलंब क्यों? सबूत मिटने का इंतजार हो रहा है क्या?”_
2. कागजों और सबूतों को मिटाने की साजिश?
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल के अंदर रिकॉर्ड, CCTV DVR और रजिस्टर में हेरफेर की आशंका है। _”क्या कागजों को दुरुस्त करने के लिए समय दिया जा रहा है?”_

3. अस्पताल के अंदर “काले कारनामे” छिपाने की कवायद? स्थानीय लोगों का कहना है – _”अंदर क्या चल रहा है, कोई नहीं जानता। बिना सील के जांच का क्या मतलब?”_ उनका मांग है कि निष्पक्ष जांच के लिए तुरंत सील हो।
4. स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के आरोप
लोगों का आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी अस्पताल प्रबंधन के दबाव में हैं। _”2 महिलाओं की मौत के बाद भी विभाग नहीं जागा। क्या जांच के नाम पर खानापूर्ति होगी?”_

5. क्या “लक्ष्मी की माया” के आगे विभाग बेबस है?
सबसे गंभीर आरोप – परिजनों का कहना है कि पैसों के लेनदेन/कमीशनखोरी के चलते कार्रवाई लटक रही है। _”क्या लक्ष्मी की माया के आगे विभाग बेबस हो गया है?”_
उपशीर्षक: “जांच के नाम पर ड्रामा बंद करो”
आक्रोशित लोगों का सीधा संदेश – _”अगर 2 मौतों के बाद भी सील नहीं हुई तो फिर कब होगी? जब सबूत मिट जाएंगे तब? स्वास्थ्य विभाग जवाब दे।”_
प्रशासन का पक्ष: सीएमएचओ कार्यालय का कहना है कि जांच टीम गठित कर दी गई है। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। अभी तक सीलबंदी की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
लीपापोती, मिलीभगत, कागज मिटाने, काले कारनामे छिपाने और “लक्ष्मी की माया” के सभी आरोप परिजनों/स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं। ये आरोप हैं, तथ्य नहीं। इनकी सत्यता जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही तय होगी। कानूनन सीलबंदी का निर्णय कलेक्टर/स्वास्थ्य विभाग ही ले सकता है।









