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गौरेला पेंड्रा मरवाही: प्रतीक्षा सूची, पैरामेडिकल चयन, लाखों के खेल और लीक चयन सूची के आरोपों से मचा हड़कंप-सखी वन स्टॉप सेंटर से आंगनवाड़ी भर्ती तक घोटालों की गूंज —

मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार: सुशासन तिहार में उठेगी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही: महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्ती प्रक्रियाएं अब बड़े विवाद और जनाक्रोश के केंद्र में आ गई हैं। सखी वन स्टॉप सेंटर से लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती तक, हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है —“क्या सरकारी भर्ती अब मेरिट से नहीं, सेटिंग और पैसों से तय हो रही है?”

पूरा मामला अब जिले में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुका है। अभ्यर्थियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप सीधे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर लग रहे हैं।

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सखी वन स्टॉप सेंटर भर्ती में “16 नंबर” का खेल?

महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर में “केस वर्कर (अ.ज.जा.)” पद की भर्ती ने सबसे बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
जारी चयन सूची के अनुसार चयनित अभ्यर्थी रोशनी उइके को शैक्षणिक मेरिट में मात्र 37 अंक मिले, जबकि प्रतीक्षा सूची में शामिल रजनी सिंह को 42.37 अंक प्राप्त थे। इसके बावजूद अंतिम चयन में इंटरव्यू के अंकों ने पूरा खेल पलट दिया।
आरोप है कि चयनित अभ्यर्थी को इंटरव्यू में 16 अंक दिए गए, जबकि अधिक मेरिट रखने वाली अभ्यर्थी को केवल 10 अंक देकर बाहर कर दिया गया।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इंटरव्यू में ऐसा कौन-सा “विशेष प्रदर्शन” हुआ जिसने कम मेरिट वाली अभ्यर्थी को सीधे चयनित करा दिया? क्या इंटरव्यू बोर्ड ने पारदर्शी मूल्यांकन किया? क्या इंटरव्यू अंक पहले से तय थे? और क्या मेरिट सूची सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई?

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अभ्यर्थियों ने कलेक्टर कार्यालय में दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, इंटरव्यू मूल्यांकन पत्रकों की समीक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।

“प्रतीक्षा सूची में भी घोटाला?”

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पैरामेडिकल कार्मिक भर्ती पर भी उठे सवाल

सखी वन स्टॉप सेंटर अंतर्गत पैरामेडिकल कार्मिक पद पर भी विवाद सामने आया है। अभ्यर्थी माया कश्यप को प्रतीक्षा सूची में रखे जाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यहां भी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पात्र अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।
अब जिले में यह चर्चा तेज है कि क्या पूरी भर्ती प्रक्रिया में सुनियोजित तरीके से इंटरव्यू अंकों का इस्तेमाल कर परिणाम प्रभावित किए गए?

आंगनवाड़ी भर्ती में “करोड़ों के खेल” के आरोप

मामला यहीं नहीं रुका। अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका भर्ती प्रक्रिया भी विवादों में घिर गई है।

गौरेला जनपद पंचायत अंतर्गत गौरखेड़ा, बनझोरका, थाडपथरा, खोड़री, धनोली, सेमरा, डुमरिया, सारबहारा और डांड जमड़ी समेत कई केंद्रों की भर्ती प्रक्रिया पर भारी भ्रष्टाचार और कथित लेनदेन के आरोप लगाए गए हैं।
जनपद पंचायत गौरेला की उपाध्यक्ष गायत्री राठौर ने कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास मंत्री को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया शिक्षा स्थायी समिति की अनुमति और निगरानी के बिना संचालित की गई। शिकायत में कई पात्र अभ्यर्थियों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने का भी दावा किया गया है।

अधिकारी अमित सिन्हा पर गंभीर आरोप

पूरा विवाद अब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी अमित सिन्हा के इर्द-गिर्द केंद्रित होता नजर आ रहा है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से मोटी रकम लेकर चयन किया गया। यहां तक आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रति अभ्यर्थी लाखों रुपये तक की वसूली हुई और पैसे के आधार पर मेरिट को प्रभावित किया गया।
हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

“चयन सूची पहले ही बाहर कैसे पहुंची?”

सबसे सनसनीखेज आरोप यह है कि चयन सूची जारी होने से पहले ही कुछ उम्मीदवारों को उनके चयन की जानकारी मिल गई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या गोपनीय सूची पहले ही दलालों तक पहुंच गई थी? क्या भर्ती प्रक्रिया पहले से “फिक्स” थी? और क्या चयन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो भर्ती प्रक्रिया में बड़े खुलासे हो सकते हैं।

शिकायतों के बावजूद जॉइनिंग जारी

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि लगातार शिकायतों और जांच की मांग के बावजूद चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग कराई जा रही है।
अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब पूरी प्रक्रिया विवादों में है, तब तक भर्ती और जॉइनिंग पर रोक लगनी चाहिए थी। इसके बावजूद प्रक्रिया जारी रहना कई नए संदेह पैदा कर रहा है।

मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार

अब पीड़ित अभ्यर्थी और स्थानीय लोग सुशासन तिहार के दौरान विष्णुदेव साय से सीधे न्याय की गुहार लगाने की तैयारी में हैं। लोगों की मांग है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो, इंटरव्यू मूल्यांकन सार्वजनिक किए जाएं, कथित लेनदेन और सेटिंग की जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और जरूरत पड़ने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दोबारा पारदर्शी चयन कराया जाए।

अब जिले में सिर्फ एक सवाल—

“क्या सरकारी नौकरी अब मेहनत और मेरिट से नहीं, बल्कि इंटरव्यू के नाम पर सेटिंग और पैसे से तय होगी?”

Ritesh GUPTA

Ritesh Gupta Editor-in-Chief | Lallanguru News Ritesh Gupta is the Editor-in-Chief of Lallanguru News, dedicated to delivering accurate, unbiased, and impactful journalism. With a strong commitment to public interest reporting, he focuses on investigative journalism, governance, legal affairs, public accountability, and issues affecting local communities. His mission is to uphold the highest standards of ethical journalism by presenting factual, credible, and timely news while giving a voice to people and promoting transparency in public life.

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