दीपका में 84 लाख का ‘अंधेरा घोटाला’: स्ट्रीट लाइट के नाम पर मौत के खंभे खड़े!”
पार्षद का बड़ा आरोप—30-40% कमीशनखोरी, बिना सुरक्षा के लगाए जा रहे पोल, कभी भी हो सकती है जनहानि

कोरबा-दीपका में विकास के नाम पर एक बड़ा खेल सामने आया है, जहां 84 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट योजना अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन चुकी है, वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद कमलेश जायसवाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को शिकायत भेजते हुए आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में ठेकेदार और नगर पालिका अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रख दिया गया है और जनता की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है!
आरोप है कि जिन खंभों को मजबूत कंक्रीट बेस यानी PCC के साथ लगाया जाना था उन्हें बिना किसी ठोस नींव के सीधे जमीन में खड़ा कर दिया गया है जिससे तेज हवा या बारिश में इनके गिरने का खतरा बना हुआ है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, इतना ही नहीं मानक के अनुसार भारी और गुणवत्तापूर्ण पोल लगाने की बजाय हल्के और घटिया क्वालिटी के बिना कोटिंग वाले पोल लगाए जा रहे हैं

जिससे उनकी मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं टेंडर में तय ब्रांडेड 100 वॉट लाइट की जगह सस्ती और कम क्षमता वाली 50 से 70 वॉट की नॉन-ब्रांडेड लाइटें लगाकर सीधे तौर पर सरकारी धन की हेराफेरी की जा रही है, सुरक्षा मानकों की बात करें तो स्थिति और भी खतरनाक है जहां केबल को निर्धारित 40 से 90 सेंटीमीटर गहराई में डालने का नियम है वहां केवल 10 सेंटीमीटर नीचे दबाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है, न कहीं सही अर्थिंग की व्यवस्था है और न ही MCCB जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं
जिससे करंट फैलने और जानलेवा हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है, पार्षद का आरोप है कि इस पूरे कार्य में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का उल्लंघन है, मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब पार्षद ने नगर पालिका के इंजीनियर सिरिल भास्कर पापुला से कार्य की गुणवत्ता और मात्रा की जानकारी लिखित में मांगी तो उन्होंने जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया

जिससे संदेह और भी गहरा गया है, अब पार्षद ने छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम 2002 की धारा 9 के तहत इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को बड़े स्तर तक लेकर जाएंगे, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दीपका में स्ट्रीट लाइट के नाम पर भ्रष्टाचार की अंधेरी सच्चाई छिपाई जा रही है और क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।










