कलेक्टर जनदर्शन में रिश्वतखोर पटवारी के खिलाफ किसान की शिकायत, एक सप्ताह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सरपंचों ने उठाई आवाज __ प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?

कोरबा/पाली: सरकार द्वारा कलेक्टोरेट में आयोजित जनदर्शन का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, लेकिन पाली विकासखंड के ग्राम मांगामार से सामने आए एक मामले ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक गरीब किसान द्वारा पटवारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए जनदर्शन में शिकायत किए जाने के एक सप्ताह बाद भी कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित किसान छन्दराम धनवार ने 23 मार्च 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर बताया कि उसके पास 0.121 हेक्टेयर वन पट्टा भूमि है, जिसके पर्ची निर्माण और ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए संबंधित पटवारी राजेन्द्र साहू द्वारा 15 हजार रुपये की मांग की जा रही है। किसान का आरोप है कि वह पहले ही 1500 रुपये दे चुका है, इसके बावजूद अतिरिक्त रकम के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, उसके भाइयों से भी जमीन संबंधी कार्य के एवज में पैसे लिए जाने का आरोप है।

किसान ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह मजदूरी कर परिवार चलाता है और इतनी बड़ी राशि देना उसके लिए संभव नहीं है। विरोध करने पर उसका काम जानबूझकर लंबित कर दिया गया है।
इस मामले में चिंता की बात यह है कि शिकायत के एक सप्ताह बाद भी प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे पीड़ित का भरोसा प्रशासन पर से उठता जा रहा है।

सरपंचों ने भी उठाई आवाज
मामले को और गंभीर बनाते हुए क्षेत्र के दो ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर संबंधित पटवारी पर रिश्वतखोरी और अनुचित व्यवहार के आरोप लगे हैं। सरपंचों का कहना है कि नामांतरण, बटांकन, वन अधिकार पर्ची और अन्य राजस्व कार्यों के लिए 10 से 20 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। मांग पूरी नहीं होने पर किसानों के जरूरी काम लटका दिए जाते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृत्यु पंचनामा और वंशवृक्ष जैसे कार्यों में भी पैसे लिए जाते हैं और पटवारी का व्यवहार ग्रामीणों के प्रति असहयोगपूर्ण है। सरपंचों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई और संबंधित पटवारी के स्थानांतरण की मांग की है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
एक ओर जहां सरकार जनदर्शन के माध्यम से त्वरित न्याय का दावा करती है, वहीं इस तरह के मामलों में देरी और निष्क्रियता प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि इस गंभीर शिकायत पर प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है।









