KORBA हनुमंत कथा BREAK: कटघोरा के अग्रसेन भवन में कड़वाहट, अमरजीत सिंह-बसंत अग्रवाल भिड़े___
आयोजन और प्रचार-प्रसार को लेकर विवाद, आयोजकों में नाराजगी—बढ़ सकता है मामला

कोरबा। जिले में आयोजित हनुमंत कथा जहां लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है, वहीं इसके इतर आयोजन से जुड़े लोगों के बीच विवाद भी गहराता नजर आ रहा है। यह विवाद कथा स्थल पर नहीं, बल्कि कटघोरा स्थित अग्रसेन भवन में सामने आया, जहां कथावाचक पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ठहरे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि आयोजन से पहले से ही चल रही खटपट रविवार रात खुलकर सामने आ गई और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।

अग्रसेन भवन में मुलाकात को लेकर भिड़ंत
सूत्रों के मुताबिक, रविवार रात करीब 9 बजे कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ अग्रसेन भवन पहुंचे थे। वे पंडित धीरेन्द्र शास्त्री से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन वहां मौजूद बसंत अग्रवाल के समर्थकों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

इसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो कुछ ही देर में धक्का-मुक्की में बदल गई। विवाद की खबर मिलते ही दोनों पक्षों के समर्थक भी मौके पर पहुंच गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बसंत अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे और विवाद में शामिल हो गए। कुछ समय के लिए अग्रसेन भवन पूरी तरह विवाद का केंद्र बन गया। हालांकि, बाद में आपसी समझाइश से मामला शांत करा लिया गया और पुलिस तक बात नहीं पहुंची।

पैसे लेकर एंट्री और हस्तक्षेप के आरोप
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आ रहा है कि बसंत अग्रवाल के माध्यम से कथित तौर पर पैसे लेकर लोगों को भीतर भेजा जा रहा है। साथ ही आयोजन की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप कर मूल आयोजकों को दरकिनार करने की भी बातें कही जा रही हैं। यहां तक चर्चा है कि व्यवस्थाओं के नाम पर लाखों रुपये के खर्च का दबाव आयोजकों पर डाला जा रहा है, जिससे आर्थिक विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
मुख्य आयोजकों में दखल से बढ़ी खटपट
हनुमंत कथा का आयोजन “अपना घर सेवा आश्रम” द्वारा कराया जा रहा है। इसमें प्रमुख भूमिका अमरजीत सिंह निभा रहे हैं, जबकि डॉ. पवन सिंह कार्यक्रम सचिव हैं। राणा मुखर्जी सहित पूरी टीम लंबे समय से इस आयोजन में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि अंतिम दौर में बसंत अग्रवाल की सक्रियता बढ़ने के बाद से ही आयोजकों के बीच असंतोष और खटपट शुरू हो गई थी, जो अब सामने आ गई है।
प्रचार-प्रसार को लेकर भी उठे सवाल
कोरबा में अचानक बसंत अग्रवाल की सक्रियता और बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में लगे बैनर, पोस्टर और फ्लेक्स चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने कथित तौर पर कथा के लिए फंडिंग की है और कथावाचक के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या कोरबा में भी ‘अपना खेल’ रच रहे हैं?
सूत्रों के अनुसार, बसंत अग्रवाल की छवि पहले से विवादित रही है और अन्य क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े मामलों में उनका नाम सामने आ चुका है। ऐसे में कोरबा में उनकी सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बड़े नेताओं के साथ अपनी तस्वीरों वाले फ्लेक्स के जरिए वे खुद को स्थापित करने और आयोजन पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल शांत, आगे बढ़ सकता है विवाद
फिलहाल मामला शांत हो गया है, लेकिन जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं, उसे देखते हुए आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। आयोजन समिति फिलहाल कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में जुटी हुई है, लेकिन अंदरूनी कड़वाहट अब खुलकर सामने आ चुकी है।









