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गौरेला पेंड्रा मरवाही -जुलाई में बने मरवाही के तहसीलदार, मई में ही कर दिया शिकायत का निराकरण! जमीन मामले में तारीखों का ऐसा खेल, सरकारी दस्तावेजों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल!

3 जुलाई 2026 को पेंड्रा से मरवाही तहसीलदार पद पर पदस्थापना का आदेश, लेकिन 7 मई को ही तहसीलदार मरवाही के से जनदर्शन की जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में सरकारी आदेशों और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरवाही तहसील के ग्राम करहनी में लगभग 8.6 एकड़ आदिवासी भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला पहले ही जांच की मांग कर रहा है। लेकिन अब इस मामले में सामने आए दो सरकारी दस्तावेजों ने जमीन के कथित फर्जीवाड़े के साथ-साथ जांच प्रक्रिया को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर अविनाश कुजूर की मरवाही तहसीलदार के पद पर पदस्थापना का आदेश 3 जुलाई 2026 का है, वहीं दूसरी ओर 7 मई 2026 को ही उनके हस्ताक्षर से तहसीलदार मरवाही के पदनाम पर जनदर्शन का जांच प्रतिवेदन जारी होना दर्ज है। आखिर पदस्थापना आदेश से करीब दो महीने पहले ही मरवाही तहसीलदार के रूप में सरकारी कामकाज कैसे किया जा रहा था?

जुलाई में पदस्थापना, मई में ही तहसीलदार मरवाही के हस्ताक्षर!

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मामला तहसीलदार अविनाश कुजूर से जुड़ा है। उपलब्ध कलेक्टर कार्यालय के आदेश क्रमांक 1452/कले./स्थापना/2026 दिनांक 03/07/2026 के अनुसार अविनाश कुजूर को तहसीलदार पेंड्रा से तहसीलदार मरवाही के पद पर पदस्थ किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इससे लगभग दो महीने पहले, दिनांक 07/05/2026 को कार्यालय तहसीलदार मरवाही से कलेक्टर जनदर्शन शाखा को भेजे गए जांच प्रतिवेदन पर अविनाश कुजूर के हस्ताक्षर दर्ज हैं। पत्र में उनके नाम के नीचे स्पष्ट रूप से ‘तहसीलदार, मरवाही’ का पदनाम अंकित है।अब सवाल सीधा है कि जब मरवाही में उनकी नियमित पदस्थापना का आदेश 3 जुलाई 2026 को जारी हुआ, तो 7 मई 2026 को वे तहसीलदार मरवाही के पदनाम से सरकारी प्रतिवेदन किस प्रशासनिक अधिकार के तहत जारी कर रहे थे? क्या उन्हें इससे पहले ही मरवाही तहसील का अतिरिक्त अथवा अस्थायी प्रभार सौंप दिया गया था? यदि हां, तो संबंधित आदेश कहां है? और यदि ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो फिर मई में जारी इस सरकारी पत्र की वैधता क्या है?

दो सरकारी दस्तावेज, दो तारीखें और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल!

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एक दस्तावेज में 3 जुलाई 2026 का पदस्थापना आदेश है, जिसमें अविनाश कुजूर का वर्तमान पदस्थापना स्थल पेंड्रा और नवीन पदस्थापना स्थल मरवाही दर्शाया गया है। दूसरे दस्तावेज में 7 मई 2026 को मरवाही तहसील कार्यालय से जारी जनदर्शन जांच प्रतिवेदन है, जिस पर उन्हीं के हस्ताक्षर और तहसीलदार मरवाही का पदनाम दर्ज है। यह महज तारीखों का सामान्य अंतर नहीं, बल्कि दो सरकारी दस्तावेजों के बीच दिखाई देने वाली ऐसी प्रशासनिक विसंगति है, जिसका जवाब दस्तावेजों के साथ दिया जाना चाहिए। यदि अतिरिक्त प्रभार का आदेश मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। यदि ऐसा कोई आदेश नहीं था तो मई में जारी प्रतिवेदन किन परिस्थितियों में तैयार हुआ और किसके अनुमोदन से जारी किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शिकायत का मूल विषय कथित फर्जी रजिस्ट्री, मृत महिला को जीवित दर्शाना और आदिवासी भूमि के हस्तांतरण से जुड़ा था, उसकी वास्तविक दस्तावेजी जांच का आधार क्या था? क्या संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेजों, मृत्यु प्रमाण पत्र और पुराने राजस्व रिकॉर्ड का मिलान किया गया था? क्या स्वतंत्र जांच के बाद शिकायतकर्ता के आरोपों को असत्य पाया गया या विभागीय प्रतिवेदन के आधार पर ही शिकायतकर्ता को कटघरे में खड़ा कर दिया गया? गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई और शिकायत को पोर्टल से हटाने की अनुशंसा आखिर किस आधार पर हुई!

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कलेक्टर की तीन सदस्यीय जांच समिति कहां गायब हो गई? 10 दिन की समयसीमा के बाद भी रिपोर्ट नहीं!

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर 10 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार, निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक नहीं हुई है। अब इस जांच का दायरा केवल 8.6 एकड़ आदिवासी भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समिति को 7 मई के जांच प्रतिवेदन और 3 जुलाई के पदस्थापना आदेश के बीच दिखाई दे रही विसंगति की भी जांच करनी चाहिए। समिति यह स्पष्ट करे कि 7 मई 2026 को अविनाश कुजूर के पास मरवाही तहसील का कोई वैध अतिरिक्त अथवा अस्थायी प्रभार था या नहीं। यदि था तो आदेश कब जारी हुआ और कार्यभार कब ग्रहण किया गया? साथ ही यह भी बताया जाए कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई और शिकायत को पोर्टल से हटाने की अनुशंसा किन तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर की गई थी।

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